Sunflower oil consumption-west asia crisis: पश्चिम एशिया संकट का असर भारत में सूरजमुखी तेल की खपत पर पड़ सकता है। इस संकट की वजह से सूरजमुखी तेल की खपत घट सकती है क्योंकि इस वैश्विक संकट के कारण इसके दाम काफी बढ़ गए हैं। ऐसे में उपभोक्ता इस तेल से सस्ते विकल्प की ओर रुख कर सकते हैं। हालांकि रिफाइनरों का राजस्व स्थिर रहने की संभावना है।
क्रिसिल रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार भारत में रिफाइंड सूरजमुखी तेल की खपत इस वित्त वर्ष में लगभग 10% घटने की संभावना है। इसकी वजह वैश्विक आपूर्ति संकट और बढ़ती कीमतें हैं। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष ने क्रूड सूरजमुखी तेल की कीमतों को बढ़ा दिया है, जिससे भारतीय रिफाइनरों के लिए कच्चे तेल की भूमि लागत में इजाफा हुआ है।
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इस रिपोर्ट के अनुसार भारत में रिफाइंड सूरजमुखी तेल की खपत कुल खाद्य तेल खपत का 12-14% है। भारत में कुल खाद्य तेल की खपत 250 से 260 लाख टन है। इस तरह भारत में सूरजमुखीमुखी तेल की खपत 32 से 38 लाख टन है। सूरजमुखी तेल का अधिकांश आयात रूस और यूक्रेन से होता है। इन दोनों देशों के बीच चल रहे लंबे संघर्ष ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है। भारत ने तेल वर्ष 2024-25 में करीब 29 लाख टन कच्चे सूरजमुखी तेल का आयात किया था। चालू तेल वर्ष की नवंबर-फरवरी अवधि में यह आंकड़ा 9.11 लाख टन दर्ज किया गया, जो पिछले तेल वर्ष की समान अवधि के आंकड़े 11.47 लाख टन से कम है।
सूरजमुखी तेल महंगा होने के कारण उपभोक्ता सस्ते विकल्पों जैसे चावल के भूसी और सोयाबीन तेल की ओर रुख कर सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के महीनों में रिफाइंड सूरजमुखी तेल की खुदरा कीमतों में वृद्धि हुई है, जो जनवरी 2026 में 150 रुपये से बढ़कर 170-175 रुपये प्रति लीटर हो गई है। इसके अलावा चावल के भूसी और सोयाबीन तेल की कीमतें सूरजमुखी तेल से 10 से 20 रुपये प्रति लीटर सस्ती हैं। जिससे कुछ उपभोक्ता इन तेलों की ओर रुख कर सकते हैं।
क्रिसिल रेटिंग्स की निदेशक जयश्री नंदकुमार कहती हैं, ‘पश्चिम एशिया संघर्ष के शुरू होने के बाद से सूरजमुखी कच्चे तेल का औसत आयात मूल्य वर्तमान में $1,420–1,440 प्रति टन तक बढ़ गया है, जबकि पिछले 12 महीनों के औसत में यह $1,275 प्रति टन था। कमजोर होते भारतीय रुपये और हाई शिपिंग लागत भारत में कच्चे सूरजमुखी तेल की आयात लागत को और बढ़ा रहे हैं।’
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विश्लेषकों के मुताबिक सूरजमुखी तेल की खपत में गिरावट होगी। लेकिन रिफाइनरों का राजस्व स्थिर रहने की संभावना है। सूरजमुखी तेल उद्योग का कुल राजस्व करीब 36,000 करोड़ रुपये है। वॉल्यूम में गिरावट के बावजूद रिफाइनरों की लाभप्रदता स्थिर रहेगी क्योंकि उनके पास कीमतों में वृद्धि को अंतिम उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की क्षमता है।
रिफाइनरों ने डाउनसाइड मूल्य जोखिमों से बचने के लिए ठोस हेजिंग नीतियां अपनाई हैं। उच्च कीमतों से वॉल्यूम में गिरावट की भरपाई भी हो जाएगी। पहले खरीदी गई कम लागत वाली इन्वेंट्री से इन्वेंट्री लाभ रिफाइनरों की लाभप्रदता को बनाए रखेगा। ऑपरेटिंग मार्जिन लगभग 4.8-5% पर स्थिर रहने की संभावना है।
क्रिसिल रेटिंग्स के एसोसिएट डायरेक्टर ऋषि हरी कहते हैं रिफाइनर सामान्यतः कच्चे माल की इन्वेंट्री 30-45 दिनों की रखते हैं ताकि आपूर्ति में कोई रुकावट और कीमतों के उतार-चढ़ाव से निपट सकें। लेकिन, पश्चिम एशिया के संघर्ष के कारण कीमतों में बढ़ोतरी के कारण इन्वेंट्री घटकर 20-30 दिनों तक रह गई है। लेकिन कम इन्वेंट्री होने के कारण रिफाइनरों के लिए निकट भविष्य में तरलता पर थोड़ा सकारात्मक असर पड़ा है।
| Year | Quarter | Price ($/ton) |
|---|---|---|
| 2024 | Q1 | 1,007 |
| 2024 | Q2 | 1,044 |
| 2024 | Q3 | 1,213 |
| 2024 | Q4 | 1,206 |
| 2025 | Q1 | 1,210 |
| 2025 | Q2 | 1,258 |
| 2025 | Q3 | 1,327 |
| 2025 | Q4 | 1,418 (E) |
| 2026 | Q1 | 1,431 (P) |
Note: E – Estimated, P – Projected