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कपड़ा उद्योग को तेज निर्यात मांग से आस

Last Updated- December 12, 2022 | 3:31 AM IST

कोरोनावायरस की दूसरी लहर के कारण अस्थायी व्यवधान के बीच भारत के परिधान उद्योग को उम्मीद है कि विदेश से तेज मांग की वजह से इस क्षेत्र में तेज वृद्धि होगी। उद्योग के शीर्ष कारोबारियों के मुताबिक पश्चिमी बाजारों में परिधान पर व्यय बढ़ रहा है, जिसकी वजह से हाल के दिनों में भारत से कपड़ा व परिधान का निर्यात बढ़ा है। इसके अलावा चीन के कपड़ों पर प्रतिबंध के बाद अमेरिका और ब्रिटेन के साथ यूरोप के देशों से मांग अब भारत की ओर बढ़ी है।
अरविंद में कार्यकारी निदेशक कुलिन लालभाई ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा कि अप्रैल-मई के दौरान स्थानीय स्तर पर बंदी होने के कारण स्थानीय बाजार ठहर गया, वहीं इस दौरान अरविंद की कुल बिक्री में निर्यात की हिस्सेदारी बढ़कर 90 प्रतिशत हो गई है। लालभाई ने कहा, ‘सामान्यतया हमारी फैब्रिक की बिक्री में 60 प्रतिशत निर्यात व 40 प्रतिशत घरेलू कारोबार की हिस्सेदारी होती है। लेकिन इस समय निर्यात तेज है और हमारे कुल फैब्रिक सेल्स में निर्यात की हिस्सेदारी 90 प्रतिशत है।’
एक साल पहले लॉकडाउन के कारण मांग घट गई थी, जो अब तेजी पकड़ रही है। लालभाई ने कहा, ‘महामारी के दौरान खरीदारी को लेकर वैश्विक ब्रांड सतर्क थे और अब उनका भंडारण खाली है। अब वे उसे भर रहे हैं क्योंकि अमेेरिका, ब्रिटेन व यूरोप के बाजार खुल गए हैं। अमेरिका में बाजार खुले थे, लेकिन तमाम प्रतिबंध थे, जो अब हट गए हैं। ऑनलाइन बिक्री बढऩे से भी कारोबार बढ़ा है।’
पिछले कुछ महीनों में परिधानों का निर्यात तेज हुआ है। निर्यातकों का कहना है कि ऑर्डर बुक बेहतर है। अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (एईपीसी) के चेयरमैन ए शक्तिवेल ने कहा, ‘निर्यात बेहतर है और पिछले साल की तुलना में प्रगति अच्छी है। दूसरी लहर से माल भेजने का काम और उत्पादन कुछ हद तक प्रभावित हुआ है, लेकिन हम धीरे धीरे इस स्थिति से बाहर आ रहे हैं क्योंकि राज्यों ने अनलॉक की प्रक्रिया शुरू कर दी है।’
शक्तिवेल ने कहा, ‘चीन में उत्पादित कॉटन पर प्रतिबंध है, ऐसे में कॉटन गार्मेट्स के ऑर्डर बढ़े हैं। ज्यादा मांग की एक वजह यह भी है। मेडिकल टेक्सटाइल जैसे पीपीई सूट और मास्क की मांग अगस्त, 2020 से बढ़ी है।’
पश्चिम के खरीदार सूती कपड़े के लिए भारत का रुख कर रहे हैं, जिससे हाल के समय में कॉटन और कॉटन यार्न की कीमत बढ़ी है। इसी तरह होम टेक्सटाइल और मेड-अप्स की मांग व बिक्री में तेजी आई है। वेल्सपन के प्रवक्ता के मुताबिक अमेरिका सरकार के टेक्सटाइल व अपैरल कार्यालय (ओटीईएक्सए) के आंकड़ों के मुताबिक पिछले 3 साल में तौलिया और बेडशीट के बाजार में भारत की हिस्सेदारी 4 प्रतिशत बढ़ी है और यह क्रमश: 42 प्रतिशत और 53 प्रतिशत हो गई है।
कर्नाटक जैसे राज्यों में लॉकडाउन बढऩे से अरविंद सहित कुछ कंपनियों की गार्मेंट इकाइयों के उत्पादन पर बुरा असर पड़ा है। क्रिसिल की एक रिपोर्ट के मुताबिक महामारी की दूसरी लहर में भारत के रेडीमेड गार्मेंट सेक्टर की मांग में रिकवरी पर असर डाला है। रेटिंग एजेंसी के मुताबिक इस वित्त वर्ष में इसमें 15-20 प्रतिशत की वृद्धि होगी, जो पहले के 28-33 प्रतिशत की उम्मीद से आधा है। रिपोर्ट के मुताबिक, ‘लेकिन इस वित्त वर्ष में राजस्व ज्यादा रहेगा, जिसे तेल निर्यात मांग, ज्यादा मुनाफे और कार्यशील पूंजी के प्रबंधन में सुधार का समर्थन मिलेगा।’

First Published - June 18, 2021 | 11:36 PM IST

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