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खरीफ की आवक से घटेंगे खाद्यान्न के दाम

Last Updated- December 11, 2022 | 1:37 PM IST

देश त्योहारों के व्यस्त मौसम में प्रवेश कर गया है। सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि आने वाले सप्ताह में खाद्य कीमतों की चाल कैसी रहती है। सितंबर में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई दर बढ़कर 5 माह के उच्चतम स्तर 7.4 प्रतिशत पर पहुंच गई।
ऐसा खासकर खाद्य महंगाई बढ़ने के कारण हुआ, जो इस अवधि के दौरान 22 माह के शीर्ष स्तर 8.6 प्रतिशत पर पहुंच गई।  इस सप्ताह से खरीफ की फसलों की आवक शुरू हो चुकी है। ऐसे में व्यापारियों और बाजार में सक्रिय लोगों को उम्मीद है कि मुख्य जिंसों की कीमतें कम होंगी।  
तिलहन

तिलहन के मामले में व्यापारियों को उम्मीद है कि सोयाबीन और मूंगफली को लेकर धारणा कमजोर रहेगी और दीपावली के बाद कीमतें मौजूदा स्तर से और नीचे जाएंगी। सोयाबीन का उत्पादन इस साल ज्यादा होने की संभावना है, साथ ही आयातित खाद्य तेल की भी लगातार आपूर्ति हो रही है। मलेशिया में पाम ऑयल का पर्याप्त स्टॉक है और शुल्क ढांचा भी अनुकूल है।ओरिगो कमोडिटीज के एजीएम (कमोडिटी रिसर्च) तरुण सत्संगी ने कहा, ‘सोयाबीन के मामले में हम उम्मीद कर रहे हैं कि कम अवधि के दौरान बेहतर गुणवत्ता का सोयाबीन करीब 3,500 से 4,000 रुपये क्विंटल रहेगा।

कपास
व्यापारियों ने कहा कि हाल की बारिश का कपास के उत्पादन पर बहुत ज्यादा असर नहीं होगा और उत्पादन पिछले साल से करीब 3.8 करोड़ गांठ अधिक हो सकता है। एक गांठ में 170 किलो होता है। बेहतर उत्पादन और अंतरराष्ट्रीय कीमत कम होने के कारण कीमतें 32,000 रुपये प्रति गांठ के मौजूदा स्तर से नीचे जाकर 25,000 रुपये प्रति गांठ पहुंच सकती हैं।

मक्का और धान

मौजूदा स्तर 2,350 रुपये प्रति क्विंटल के पहले मक्के की कीमत 2,600 रुपये प्रति क्विंटल तक चढ़ गई थी। दीपावली के बाद आवक बढ़ने पर कीमत 2,000 रुपये प्रति क्विंटल तक आ सकती है। लेकिन गिरावट की संभावना सीमित दिख रही है क्योंकि मांग ज्यादा है। धान के बारे में कारोबारियों का कहना है कि ज्यादातर किस्मों की कीमतें स्थिर रहेंगी, जो बाद में बढ़ सकती है। एक अन्य व्यापारी ने कहा, ‘सबकी नजर खरीफ की फसल के वास्तविक उत्पादन और सरकारी खरीद पर टिकी है।’ 
दलहन
अरहर के बारे में व्यापारियों को उम्मीद है कि खरीफ सीजन में इसका उत्पादन 36 लाख टन होगा जबकि मांग 45 लाख टन रहेगी। इस अंतर को अफ्रीका और म्यांमार से आयात कर पूरा किया जाएगा। आईग्रेन इंडिया में जिंस  विशेषज्ञ राहुल चौहान ने कहा कि भारी आयात के कारण अरहर की कीमत कम रहेगी। 

First Published - October 17, 2022 | 9:29 PM IST

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