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फिर सामने आया रेडियोएक्टिव स्टील का मामला

Last Updated- December 10, 2022 | 5:51 PM IST

यूरोप को निर्यात किए जाने वाले निर्यात में एक बार फिर रेडियोएक्टिव स्टील का मामला सामने आया है।
इसके चलते इंजीनियरिंग के  सामानों के 2300 करोड़ डॉलर के निर्यात पर संकट के बादल छा गए हैं। यह मामला सबसे पहले 2007 में सामने आया था, जो अब एक गंभीर मसला बन गया है।
इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रोमोशन काउंसिल (ईईपीसी) के वरिष्ठ संयुक्त निदेशक सुरंजन गुप्ता ने कहा कि यह मामला यूरोप के लिहाज से बहुत गंभीर बन जाता है, क्योंकि इसके चलते बहुत सारे कंटेनरों को रोक दिया गया है। इस मसले पर चर्चा करने के लिए पिछले सप्ताह स्टील मंत्रालय ने बैठक भी की है।
इंजीनियरिंग के सामानों का कुल निर्यात 3300 करोड़ डॉलर का होता है, जिसमें यूरोप की हिस्सेदारी 70 प्रतिशत है। गुप्ता ने कहा कि यह मुद्दा तब से महत्वपूर्ण था, जब इसके लिए कोई विशेष दिशानिर्देश नहीं बने थे कि समिश्रण की मात्रा कितनी होगी। यह नान ट्रैफिक बैरियर के रूप में देखा गया और सरकार यह मसला डब्ल्यूटीओ के स्तर तक ले गई थी।
हालांकि मंत्रालय ने भी आंतरिक रूप से कहा था कि कंपनियों को इस सिलसिले में सुधारात्मक कदम उठाना चाहिए। इससे जुड़ी मुंबई की एक कंपनी ने कहा कि उन्होंने पहले ही सुधारात्मक कदम उठाए हैं और उन्होंने एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड (एईआरबी) से प्रमाण पत्र भी हासिल कर लिया है।
कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न दिए जाने की शर्त पर कहा कि उनकी कंपनी को समस्या इसलिए हुई थी कि स्टील के आपूर्तिकर्ता के स्तर से समस्या आई थी, इसके चलते रोके हुए स्क्रैप का आयात कर लिया गया और यह समस्या देश भर में फैल गई।
ईईपीसी के पूर्व चेयरमैन राकेश शाह ने कहा कि कम से कम 2 कंपनियों ने काउंसिल से संपर्क किया है और उन्होंने इस बारे में राय मांगी है कि इस समस्या से किस तरह से निपटा जाए।
एईआरबी के रेडियोलॉजिकल सेफ्टी डिवीजन के प्रमुख एसपी अग्रवाल ने कहा कि कुछ सामग्री निर्यातकों को वापस भेज दी गई है और उसके बाद एईआरबी के पास उसके सुरक्षित निस्तारण के लिए वापस लाया जाएगा।
ढलाई के सामान के निर्यात के मामले में यह एक साल पहले प्रकाश में आया था। बहरहाल पिछले साल के बाद से इसे एक बार फिर प्रमुखता हासिल हो गई थी, जब फ्रांस की न्यूक्लियर सेफ्टी अथॉरिटी ने एईआरबी को इलेवेटर स्विच को रोके जाने के बारे में सूचित किया था। इसमें बड़ी मात्रा में कोबाल्ट 60 की मात्रा पाई गई थी, जिससे रेडियेशन के चलते कमजोरी और त्वचा में जलन हो सकती थी।
गुप्ता ने कहा कि समस्या यह थी कि माल को रोके जाने के बारे में कोई निश्चित दिशानिर्देश नहीं था। अमेरिका में जहां इस मामले में पूरी सख्ती बरती जाती है, यूरोप में इसके लिए कोई दिशानिर्देश नहीं तैयार किए गए हैं।
शाह ने कहा कि जहां तक अमेरिका की बात है, अगर कंटेनर का जरा सा भी अंश पा.या जाता है तो पूरी सामग्री को रोक दिया जाता है और शेष माल को भी वापस भेज दिया जाता है।
2004 में भूषण स्टील ने जानकारी के अभाव में ईरान से मिसाइल स्क्रैप का आयात किया था, जिसकी वजह से फैक्टरी में विस्फोट हो गया था। बहरहाल उसके बाद से कंपनी हमेशा स्टील के कतरन का स्क्रैप ही विकसित देशों से मंगाती है, जहां माल के लदान के पहले पोर्ट पर अच्छी तरह से निरीक्षण किया जाता है।
एईआरबी द्वारा जागरूकता अभियान चलाए जाने के बाद से ज्यादातर बड़े उत्पादकों ने जांच के बाद ही आयात करना शुरू किया, जिससे मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार किए जा सकें।
इंजीनियरिंग सामान निर्यात पर असर
निर्यात किए जाने वाली स्टील की इंजीनियरिंग  सामग्री में रेडियोएक्टिविटी का मामला पहली बार 2007 में सामने आया
एक बार फिर यह मामला सामने आने पर यूरोप जाने वाले माल को रोक दिया गया।
यूरोप को किए जाने वाले 2300 करोड़ डॉलर के इंजीनियरिंग  के सामानों के निर्यात पर छा गए हैं संकट के बादल

First Published - February 25, 2009 | 12:17 PM IST

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