भारत गन्ने से एथनॉल उत्पादन पर अंकुश लगाने पर विचार कर रहा है क्योंकि दुनिया का सबसे बड़ा चीनी उपभोक्ता घरेलू कमी से जूझ रहा है।
समाचार एजेंसी ब्लूमबर्ग ने इस मामले से परिचित सूत्रों के हवाले से बताया कि अधिकारी चालू सीजन के लिए जैव ईंधन (एथनॉल) का उत्पादन करने के लिए गन्ने के उपयोग को सीमित करने के प्रस्ताव का अध्ययन कर रहे हैं। इस विषय पर फिलहाल कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है और योजनाएं अभी भी बदल सकती हैं।
यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है तो देश में चीनी की कमी को कम करने में मदद मिलेगी। इस प्रस्ताव के कारण बुधवार को न्यूयॉर्क में चीनी की वायदा कीमतों में 7.9% की गिरावट दर्ज की, जो 10 महीनों में सबसे बड़ी गिरावट है। इसके साथ ही यह प्रस्ताव भारत के लिए चीनी आयात करने की किसी भी संभावना को भी ख़त्म कर देगा।
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खाद्य मंत्रालय ने इस विषय पर टिप्पणी के अनुरोध का कोई जवाब नहीं दिया। अनियमित बारिश ने भारत में गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचाया, जिससे दुनिया के दूसरे सबसे बड़े चीनी उत्पादक को निर्यात पर प्रतिबंध 31 अक्टूबर से आगे बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ा। पैरागॉन ग्लोबल मार्केट के प्रबंध निदेशक माइकल मैकडॉगल ने कहा कि एथनॉल उत्पादन को सीमित करने से भारत में चीनी के भंडार में और गिरावट नहीं आएगी।
रिपोर्ट में कहा गया कि हालांकि इस उपाय से भारत को खाद्य मुद्रास्फीति पर काबू पाने में मदद मिल सकती है, लेकिन इसका सीमित प्रभाव हो सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि सूत्रों के अनुसार कुछ एथनॉल इस साल की शुरुआत में एक निविदा में बेचा जा चुका है और इसका उत्पादन करने की आवश्यकता होगी।