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खाद्य तेलों के आयात में होगी कमी

Last Updated- December 08, 2022 | 7:46 AM IST

देश के खाद्य तेल आयातकों का अनुमान है कि मौजूदा तेल वर्ष (नवंबर से अक्टूबर) के दौरान खाद्य तेल का आयात 5 फीसदी तक घट सकता है।


इसकी वजह कीमतों में हो रहा तेज उतार-चढ़ाव है। हाल यह है कि जिन अनुबंधों के भाव काफी ऊंचे चले गए हैं, आयातक उन्हें रद्द कर रहे हैं। कारोबारियों के मुताबिक, इसकी एक और वजह इंडोनेशिया द्वारा भारत की 30 कंपनियों को काली सूची में डाल दिया जाना है।

अभी बाली में इंडोनेशियाई पाम तेल सम्मेलन में गोदरेज इंटरनेशनल के निदेशक और जाने-माने खाद्य तेल विशेषज्ञ दोराब ई मिस्त्री ने कहा कि सीमा शुल्क  2008-09 के दौरान खाद्य तेलों का आयात पिछले साल के 63 लाख टन की तुलना में घटकर महज 60 लाख टन रह जाएगा। इस तरह इस साल आयात में करीब 3 लाख टन (5 फीसदी) की कमी का अनुमान है।

उनके मुताबिक, तेल वर्ष 2007-08 के दौरान भारत का तेल आयात बढ़कर रिकॉर्ड 63 लाख टन तक पहुंच गया। इसकी वजह आयात शुल्क बढ़ने की उम्मीद में ज्यादातर शिपमेंट का सितंबर और अक्टूबर के दौरान ही निपट जाना रही।

खाद्य तेल विशेषज्ञ मिस्त्री के मुताबिक, कच्चे सोयातेल का आयात आधे से ज्यादा घटकर तीन लाख टन रह जाने की संभावना है। वहीं कच्चे पाम तेल का आयात 52 लाख टन पर स्थिर रहेगा। मिस्त्री की राय है कि 2008-09 में खाद्य तेलों का आयात सीमा शुल्क पर निर्भर करेगा।

हालांकि उन्होंने अभी साफ-साफ बताने से इनकार कर दिया। घरेलू बाजार में सोयाबीन की कम कीमतों से किसान नाखुश थे। ऐसे में किसानों ने इंतजार करना बेहतर समझा।

गौरतलब है कि पिछले महीने सरकार ने कच्चे सोयाबीन तेल पर 20 प्रतिशत के आयात शुल्क को फिर से लागू कर दिया, जिसे अप्रैल में समाप्त कर दिया गया था।

हालांकि अन्य सभी तेलों के आयात शुल्क अपरिवर्तित ही रहे। बाजार की मौजूदा हालत देखकर जानकारों को लगता है कि बहुत ही जल्द सीमा शुल्क बढ़ाया जाने वाला है। विश्लेषकों के अनुसार, तेज आर्थिक विकास के कारण भारत में तेल की प्रति व्यक्ति खपत वर्ष 2007-08 में मामूली रूप से बढ़ी है।

मिस्त्री की मानें तो 2007-08 की आखिरी तिमाही में कच्चे पाम तेल की सस्ती कीमतों ने इसकी खपत को बढ़ाने का काम किया है। अनुमान है कि इस साल खाद्य तेल की कुल घरेलू मांग पिछले साल के 1.28 करोड़ टन से बढ़कर 1.31 करोड़ टन हो जाएगी।

उम्मीद है कि इस बार तिलहन का घरेलू उत्पादन पिछले साल के 69.85 लाख टन से बढ़कर 71.7 लाख टन हो जाएगी। इस बार सरसों का उत्पादन 16.5 लाख टन से बढ़कर 18.5 लाख टन होने का अनुमान है।

कृषि मंत्रालय के अनुसार, रबी सत्र की मुख्य फसल सरसों का रकबा चालू सत्र में पिछले सप्ताह तक 12.59 प्रतिशत बढ़कर 62.29 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले साल महज 55.32 लाख हेक्टेयर था।

First Published - December 7, 2008 | 11:52 PM IST

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