मिट्टी की नमी का सर्वोत्तम उपयोग करने के लिए किसानों की जल्दबाजी से इस बार रबी फसलों की बोआई अपनी स्थिर गति से जारी रही, लेकिन उत्तरी राज्यों में धान की कटाई में देरी होने से गेहूं की बोआई अभी शुरू नहीं हो सकी है। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और यहां तक की मध्य प्रदेश जैसे प्रमुख राज्यों में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की देरी से वापसी के कारण खेत गीले हैं और इस कारण धान की कटनी देरी हो रही है।
भारतीय मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, भारत में 1 से 21 अक्टूबर तक मॉनसून के बाद की बारिश सामान्य से 73 फीसदी अधिक हुई जिसमें अधिकांश उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश में हुई थी। व्यापारियों का कहना है कि कई राज्यों में किसान धान की व्यापक कटाई से पहले कुछ और दिन तेज धूप का इंतजार कर रहे हैं ताकि उन्हें फसल का पूरा मूल्य मिल सके। लंबे समय तक नमी में रहने से उच्च नमी वाले धान या निम्न गुणवत्ता वाले धान की बाजार में कम कीमत मिलती है।
कुछ जगहों पर क्रेता-विक्रेता से यह सुनिश्चित करने के लिए कहता है कि धान पूरी तरह से सूख गया है जिससे किसानों पर अतिरिक्त व्यय का बोझ पड़ता है। कुल मिलाकर, आमतौर पर हर साल करीब 3.05 करोड़ हेक्टेयर में धान की बोआई की जाती है, लेकिन इस साल व्यापार हलकों में यह चर्चा है कि रकबे में 10-15 फीसदी की वृद्धि हो सकती है क्योंकि किसान चना, मसूर जैसी फसलों से गेहूं की ओर रुख कर सकते हैं।
अन्य फसलों में, शुरुआती दिनों में हालांकि रबी के मौसम का सबसे बड़ा तिलहन यानी सरसों का रकबा पिछले साल की तुलना में लगभग 41 फीसदी अधिक है जबकि चना का रकबा पिछले साल की तुलना में 86 फीसदी अधिक है। पूरे सीजन में करीब 64 लाख हेक्टेयर सरसों की बोआई होती है और बाजार के सूत्रों का कहना है कि गेहूं की तरह यहां भी इस साल रकबे में 5-10 फीसदी का उछाल आ सकता है।