केंद्र सरकार ने आज विश्वास जताया कि इस साल जाड़े के मौसम में प्याज व दलहन की कीमत में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी नहीं होगी। इन दो प्रमुख जिंसों की कीमत मौसम के मुताबिक बहुत ज्यादा बदलती है। सरकार के मुताबिक बाजार में हस्तक्षेप के लिए इन जिंसों का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।
टमाटर की कीमत पिछले कुछ महीनों से बढ़ रही है। यह एक और जिंस है, जिसके दाम में उतार चढ़ाव रहता है। सरकार ने कहा कि इसकी कीमत में कुछ समय तक उतार चढ़ाव बना रह सकता है, क्योंकि यह बहुत ज्यादा खराब होने वाली सब्जी है और इसका भंडारण कठिन है। उपभोक्ता मामलों के सचिव रोहित सिंह ने संवाददाताओं से कहा, ‘त्योहारों के दौरान दलहन की कीमत नहीं बढ़ेगी। साथ ही प्याज का भी सरकार के पास पर्याप्त स्टॉक है और जरूरत पड़ने पर इसकी उपलब्धता बढ़ाई जा सकती है।’
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के पास दलहन का 43 लाख टन स्टॉक है, जो पिछले कुछ साल की तुलना में सबसे ज्यादा है। इसमें से करीब 88,000 टन राज्यों को दिया गया गया है, जो 8 रुपये प्रति किलो छूट पर दिया जाता है। इस दलहन को राज्य सरकारों की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से बेचा जा सकता है। प्याज के मामले में देखें तो सरकार के पास करीब 2.5 लाख टन स्टॉक है, जिसमें से करीब 54,000 टन चरणबद्ध तरीके से राज्यों को दिया गया है।
सचिव ने कहा कि देर तक बारिश की वजह से खरीफ की प्याज की फसल खराब हुई है, लेकिन सरकार को भरोसा है कि वजह असमान्य बढ़ोतरी पर काबू पा लेगी और नवंबर व दिसंबर तक बेहतर स्टॉक आ जाएगा। प्याज की फसल साल में 3 बार तैयार होती है। खरीफ की फसल अक्टूबर-नवंबर में तैयार होती है, उसके बाद खरीफ की पछेती फसल जनवरी व मार्च में आती है। वहीं रबी की फसल मार्च से मई के बीच आती है। सभी तीन समयावधियों में रबी के दौरान सबसे ज्यादा प्याज की फसल आती है, जिसका भंडारण भी किया जा सकता है।
सचिव ने कहा कि प्याज के आने वाले सीजन में सरकार इरैडिटेशन तकनीक के इस्तेमाल की संभावना तलाश रही है, जिससे प्याज रखने की समयावधि बढ़ सके। इस योजना को पीपीपी मॉडल पर लागू किया जा सकता है। एक प्रौद्योगिकी के रूप में इरैडिटेशन पिछले कुछ साल से प्रचलन में है और प्याज की शेल्फ लाइफ बढ़ाने में इसे कारगर पाया जा रहा है, लेकिन अब तक भारत में इसका व्यापक तौर पर इस्तेमाल नहीं हुआ है।
सिंह ने कहा, ‘हर साल देश में कुल प्याज उत्पादन का करीब 25 प्रतिशत बरबाद हो जाता है और करीब 11,000 करोड़ रुपये का प्याज खराब होता है। इसकी वजह है कि इसको अच्छी स्थिति में 6 महीने से ज्यादा नहीं रखा जा सकता।’सरकार ने कहा कि पूरे देश में प्रमुख दलहन की औसत खुदरा कीमत इस साल की शुरुआत से ही स्थित है और इसमें सामान्य मौसमी बढ़ोतरी हुई है। पिछले कुछ महीने में चने व मसूर की दाल की औसत कीमत कुछ कम हुई है।
वहीं इस दौरान अरहर उड़द और मूंग दाल की औसत कीमत मामूली बढ़ी है। देश भर में प्याज की औसत कीमत में पिछले साल की तुलना में उल्लेखनीय रूप से 28 प्रतिशत गिरी है। इस बीच एक और संबंधित मामले में उपभोक्ता मामलों के सचिव ने कहा कि सरकार पूरे देश में विभिन्न उपभोक्ता अदालतों में लंबित मामलों की संख्या में कमी लाने के लिए अगले कुछ हफ्तों में एक व्यापक अभियान शुरू करने जा रही है।