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संरक्षण शुल्क पर ली अदालत की शरण

Last Updated- December 11, 2022 | 4:35 AM IST

एफएमसीजी की एक बड़ी कंपनी हिन्दुस्तान यूनिलीवर (एचयूएल), ग्लास और डिटर्जेंट के कुछ संगठनों के साथ मिलकर दिल्ली और बंबई उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की है ताकि चीन से आयातित सोडा ऐश पर लगाए जाने वाले 20 फीसदी संरक्षण शुल्क पर रोक लगाई जाए।
यह शुल्क 20 अप्रैल को डायरेक्टरेट जनरल (डीजी) सेफगार्ड ने लगाया था। एचयूएल के अलावा जिन कंपनियों ने बंबई और दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी उसमें सेंट गोबेन, महाराष्ट्र स्मॉल स्केल डिटर्जेंट मैन्युफैक्चर्स और ऑल इंडिया ग्लास फेडरेशन शामिल है।
कई दूसरी कंपनियां भी याचिका दायर करने की प्रक्रिया में हैं। डीजी सेफगार्ड्स की रिपोर्ट 16 जनवरी को आई और यह 30 जनवरी को भारत के राजपत्र में प्रकाशित किया गया। उसका आधार बना अल्कली मैन्युफैक्चर्स ऑफ इंडिया (एएमएआई) द्वारा दिया गया आवेदन।
संगठन ने डीजी सेफगार्ड्स को डाईसोडियम कार्बोनेट जिसे सोडा ऐश कहा जाता है उसके बढ़े हुए आयात पर नजर रखने के लिए कहा ताकि इससे घरेलू उद्योग के बाजार को धक्का न लगे। डीजी सेफगार्ड को आवेदन टाटा केमिकल्स, गुजरात हेवी केमिकल्स (जीएचसीएल), सौराष्ट्र केमिकल्स, बिरला सागर, डीसीडब्ल्यू और निरमा की ओर से पेश किया गया।
ये कंपनियां सोडा ऐश का लगभग 90 फीसदी तक घरेलू उत्पादन करती हैं। डीजी सेफगार्ड्स की रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने चीन से आयातित सोडा ऐश पर 20 फीसदी तक का संरक्षण शुल्क लगाया। डिटर्जेंट और ग्लास निर्माता ही सोडा ऐश के प्राथमिक उपयोर्गकत्ता हैं।
मिसाल के तौर पर डिटर्जेंट की लागत में सोडा ऐश का हिस्सा 40 फीसदी तक होता है और इसका बाजार 10,188 करोड़ रुपये तक का है। देश में चीन से आयातित सोडा ऐश को तरजीह नहीं देश जाती और घरेलू कंपनियां अब नए संरक्षण शुल्क को अपना निशाना बना रही हैं। इसकी वजह यह है कि घरेलू सोडा ऐश निर्माताओं की मौजूदगी दुनिया भर में बढ़ रही है।
इसके साथ ही केन्या, रोमानिया, अमेरिका और अफ्रीका जैसे देशों में सोडा ऐश की घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कीमत पर नियंत्रण भी बढ़ रहा है। मिसाल के तौर पर टाटा केमिकल्स दुनिया का सबसे बड़ा दूसरा सोडा ऐश निर्माता है और इसका निर्माण क्षमता केन्या, ब्रिटेन और नीदरलैंड जैसे देशों में भी है।
जीएससीएल दुनिया की चौथी सबसे बड़ी सोडा ऐश निर्माता कंपनी है जिसकी क्षमता अमेरिका और रोमानिया तक फैली हुई है। फेना डिटर्जेट के एक सूत्र का कहना है, ‘स्थानीय सोडा ऐश निर्माता घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोडा ऐश की कीमतों को लेकर एकाधिकार दिखा रहे हैं। वे चीन में सोडा ऐश की बाजार दर से 40 फीसदी ज्यादा दर लगा रहे हैं।’
सोडा ऐश के आयातक भी डीजी सेफगार्ड्स की सिफारिश से खुश नहीं हैं क्योंकि उन्हें अपना मामला रखने के लिए मौका नहीं दिया गया। उद्योग के एक सूत्र ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, ‘यह न्याय के आधारभूति नीतियों के खिलाफ एक मनमाना रवैया है।

First Published - May 1, 2009 | 3:22 PM IST

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