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चांदी कारोबार का कठिन दौर

Last Updated- December 10, 2022 | 7:25 PM IST

चांदी का कारोबार इस समय बहुत बुरे दौर से गुजर रहा है। इसकी कीमतों में जबरदस्त उछाल आई है। कारोबारी इसका स्टॉक जमा करने में जोखिम महसूस कर रहे हैं, क्योंकि इसकी मांग कम हो गई है।
चांदी के मामले में सोने की तुलना में परिदृश्य कुछ अलग ही है। सोने के मामले में जहां कारोबारी इसका स्टॉक बना रहे हैं वहीं चांदी की कीमतें इसलिए बहुत ज्यादा बढ़ी हैं, क्योंकि इसका वायदा कारोबार महंगी दरों पर हुआ है। अब केवल एक ही उपाय है कि कीमतों में गिरावट आए, तभी जाकर उपभोक्ता इसकी ओर आकर्षित होंगे।
भारतीय बाजार की स्थिति देखें तो चांदी और सोने की कीमतें पिछले नवंबर महीने में न्यूनतम स्तर पर थीं। उसके बाद से इसकी कीमतों में क्रमश: 24.86 और 36.2 प्रतिशत की उछाल दर्ज की गई है। इस अवधि के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमतों में 46.78 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है, जबकि सोने की कीमतों में 17.36 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
इसका मतलब यह हुआ कि भारतीय बाजार में चांदी की कीमतों में उतनी तेजी से उछाल नहीं आया है, जितनी कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की तुलना में चांदी में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सितंबर 2008 के बाद भारत में बड़े पैमाने पर चांदी का आयात किया गया, जिसकी वजह से भारत में कीमतों में बढ़त सीमित रही।
इसकी वजह से चांदी के बाजार में अजीब स्थिति बन गई। सोने चांदी के विश्लेषक भार्गव वैद्य कहते हैं कि कारोबारी इस समय चांदी का स्टॉक करने में जोखिम महसूस कर रहे हैं, क्योंकि इस समय खरीदारों में बहुत ज्यादा कमी आई है। कारोबारियों को इस बात का भय है कि वर्तमान दरों को देखते हुए कीमतों में करेक् शन की गुंजाइश है, जो सोने की तुलना में कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ा है।
इस साल की शुरुआत से ही चांदी का आयात थम सा गया है। कीमतों में उछाल की वजह से लोग पुराना माल बेच रहे हैं, जो फिर से तैयार होकर बाजार में आएगा। पिछले दो महीनों में रिसाइक्लिंग वाली चांदी 100-150 टन से ज्यादा मात्रा में बाजार में आई है।
बांबे बुलियन एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश हुंडिया ने कहा कि इस उद्योग की मांग पुरानी चांदी से ही पूरी हो रही है और पिछले दो महीने के दौरान चांदी का आयात नहीं हुआ है। सोने का आयात 2008 की अंतिम तिमाही में कम हुआ है, वहीं इस दौरान चांदी के आयात में जबरदस्त बढ़त देखी गई।
अनुमानों के मुताबिक 2008 में चांदी का आयात 3,000 टन के करीब रहा है, जिसमें से ज्यादा आयात वर्ष 2008 की तीसरी तिमाही के अंत और चौथी तिमाही में ही हुआ है। लंदन की एक कीमती धातुओं की सलाहकार एजेंसी जीएफएमएस लिमिटेड की धातु विश्लेषक गार्गी शाह ने कहा कि वर्तमान दशक (2001-07) में हुए चांदी के औसत आयात को देखें तो वर्ष 2008 में कुल आयात औसत से ज्यादा हुआ है, जो 2863 टन का है।
2008 की अंतिम तिमाही में बड़े पैमाने पर आयात की मुख्य वजह यह है कि इस समय कीमतों में अचानक गिरावट आ गई थी। सामान्यतया इसका आयात समुद्री मार्ग से किया जाता है, लेकिन इस दौरान वायुमार्ग से भी आयात हुआ। कुछ कारोबारियों वायदा बाजार के माध्यम से भी डिलिवरी ली, क्योंकि कीमतें गिर गई थीं, हालांकि महंगे बुकिंग के चलते उन्हें नुकसान भी उठाना पडा।
गार्गी शाह ने कहा कि 2008 की दूसरी छमाही में कीमतों में करेक्शन हुअ, क्योंकि पिछली जुलाई में कीमतें 26,000 तक पहुंच गई थीं और बाद में 17,000 तक आ गईं। इस तरह से कीमतों में भारी गिरावट ही आयात बढ़ने के पीछे प्रमुख वजह रही।

First Published - March 9, 2009 | 5:28 PM IST

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