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कृषि क्षेत्र में शानदार वृद्धि

Last Updated- December 12, 2022 | 7:42 AM IST

वित्त वर्ष 2021 की कोविड प्रभावित अर्थव्यवस्था में कृषि एवं सहायक गतिविधियों का अच्छा प्र्रदर्शन लगातार जारी है, जिन्होंने अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में स्थिर मूल्यों पर 3.9 फीसदी की शानदार वृद्धि दर्ज की है। इसमेें खरीफ सीजन में अच्छे उत्पादन की अहम भूमिका रही है।
हालांकि सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) द्वारा जारी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के दूसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक पूरे वित्त वर्ष में कृषि क्षेत्र की वृद्धि घटकर 3 फीसदी रह सकती है, जबकि मंत्रालय ने पहले अग्रिम अनुमान में 3.4 फीसदी वृद्धि का अनुमान जताया था। मंत्रालय के अनुमान में गिरावट से बहुत से लोगों को चौंकाया है।
केयर रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘कृषि एवं सहायक गतिविधियों में तीसरी तिमाही में वृद्धि मुख्य रूप से अच्छे खरीफ उत्पादन की बदौलत हुई है, जिसका पता हाल में जारी कृषि उत्पादन के अनुमानों से चलता है। लेकिन मैं दो अनुमानों के बीच पूरे साल का कृषि क्षेत्र का जीवीए 3.4 फीसदी से घटाकर 3 फीसदी किए जाने से थोड़ा अचंभित हूं। इससे पता चलता है कि सहायक गतिविधियों के चौथी तिमाही में बहुत अच्छा प्रदर्शन नहीं करने के आसार हैं क्योंकि ताजा अनुमानों के मुताबिक रबी फसलों का उत्पादन शानदार रहने की संभावना है।’
एमओएसपीआई के आंकड़ों से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2021 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर से दिसंबर) के दौरान चालू कीमतों पर कृषि क्षेत्र की वृद्धि 7.4 फीसदी अनुमानित है। इसका मतलब है कि महंगाई का असर 3.5 फीसदी रहा। यह वित्त वर्ष 2020 की इसी तिमाही में महंगाई के असर 11.7 फीसदी के मुकाबले कम है। कृषि उत्पादों में ऊंची महंगाई को उत्पादकों के लिए अच्छा माना जाता है, बशर्ते कि इसका पूरा लाभ उन तक पहुंचे। संभवतया कृषि ही एकमात्र ऐसा क्षेत्र है, जिसने सभी तिमाहियों में वृद्धि की धनात्मक दर बरकरार रखी है। अन्य क्षेत्र मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। हालांकि अन्य कई क्षेत्र पहली और दूसरी तिमाहियों में ऋणात्मक वृद्धि दर्ज करने के बाद वित्त वर्ष 2021 की तीसरी तिमाही में धनात्मक वृद्धि की राह पर लौट आए हैं। मगर कृषि की वृद्धि सबसे अलग है।
एमओएसपीआई ने कहा कि दूसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक पूरे वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान कृषि एवं सहायक गतिविधियों का सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) 3 फीसदी अनुमानित है। यह कुुछ महीने पहले जारी पहले अग्रिम अनुमान 3.4 फीसदी से थोड़ा कम है। पिछले वित्त वर्ष का जीवीए स्थिर मूल्यों पर 4.3 फीसदी था।
इस बीच कुछ दिनों पहले जारी कृषि उत्पादन के दूसरे अग्रिम अनुमान में दर्शाया गया है कि खरीफ और रबी सीजन में तगड़ी पैदावार की बदौलत फसल वर्ष (जुलाई से जून) 2020-21 में देश में खाद्यान्न का उत्पादन अब तक के सर्वोच्च स्तर 30.3 करोड़ टन पर रहने के आसार हैं। पिछले पांच साल (फसल वर्ष 2015-16 से फसल वर्ष 2019-20 तक) के दौरान औसत खाद्यान्न उत्पादन 27.88 करोड़ टन रहा है। अच्छे मॉनसून और अनुकूल मौसम से प्रमुख फसलों के उत्पादन में इस बढ़ोतरी में मदद मिलने के आसार हैं। अगर सरकार ने कीमतों को स्थिर करने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर भारी मात्रा में खरीद नहीं की तो उत्पादन में बढ़ोतरी से आगामी महीनों में चने और सरसों जैसी कुछ फसलों की घरेलू बाजार कीमतों पर दबाव बढऩे की आशंका है।
पूरे फसल वर्ष 2020-21 में दलहन का कुल उत्पादन 2.44 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के उत्पादन 2.30 करोड़ टन से अधिक है। यह पिछले पांच साल के औसत उत्पादन से भी अधिक है, जो 2.19 करोड़ टन अनुमानित है। इसी तरह तिलहन का उत्पादन पूरे फसल वर्ष 2020-21 में 3.73 करोड़ टन अनुमानित है। यह पिछले साल के उत्पादन 3.32 करोड़ टन से अधिक है।
गन्ने का उत्पादन 2020-21 में 39.76 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जो 2019-20 के मुकाबले करीब 2.71 करोड़ टन अधिक है। कपास का उत्पादन 3.65 करोड़ गांठ रहने का अनुमान है, जो पिछले साल से 4.8 लाख गांठ अधिक है। एक गांठ में 170 किलो  वजन होता है। 2020 में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून औसत से 9 फीसदी अधिक  था। यह सामान्य से अधिक बारिश का लगातार दूसरा साल था।

First Published - February 26, 2021 | 11:49 PM IST

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