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Trump Tariffs: कमोडिटी कीमतों की गिरावट से शेयर बाजार पर दबाव, लेकिन उपभोक्ता कंपनियों को राहत

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अप्रैल 2020 से अप्रैल 2022 के बीच निफ्टी50 सूचकां में 74 फीसदी की उछाल आई थी जिसे उस दौरान ईपीएस सूचकांक में 51 फीसदी की वृद्धि से दम मिला था।

Last Updated- April 08, 2025 | 10:31 PM IST
Trump tariffs
टैरिफ की घोषणा करते अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप

ट्रंप शुल्क के बाद कमोडिटी एवं कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट का प्रभाव भारत में शेयर मूल्यों और कंपनी जगत की आय में गिरावट के रूप में दिखेगी। ऐतिहासिक तौर पर कमोडिटी एवं कच्चे तेल की कीमतों और शेयर मूल्य एवं कॉरपोरेट मुनाफे के बीच काफी अनुकूल संबंध रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, कमोडिटी कीमतों में नरमी से आर्थिक वृद्धि एवं कुल मांग का संकेत मिलता है। उसका कंपनी जगत की वृद्धि एवं वित्तीय प्रदर्शन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। हालांकि कमोडिटी और ऊर्जा की कीमतों में नरमी से एफएमसीजी, पेंट्स, सीमेंट, फार्मा और वाहन जैसे उपभोक्ता उद्योगों की आय और मार्जिन को दम मिलेगा। मगर खनन एवं धातु कंपनियों और तेल एवं गैस कंपनियों जैसे कमोडिटी उत्पादकों की आय में गिरावट से उसका प्रभाव खत्म हो सकता है।

सिस्टमैटिक्स इंस्टीट्यूशनल इक्विटी के सह-प्रमुख (अनुसंधान एवं इक्विटी रणनीति) धनंजय सिन्हा ने कहा, ‘ऐतिहासिक तौर पर कमोडिटी की कीमतें, कॉरपोरेट आय और शेयर बाजार की चाल एक ही दिशा में होती है। इसलिए कमोडिटी की कीमतों में भारी गिरावट से आगामी तिमाहियों में कॉरपोरेट आय एवं मुनाफे में नरमी का संकेत मिलता है।’

सिन्हा ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से थोक मुद्रास्फीति में कमी दिख सकती है। मगर खुदरा मुद्रास्फीति पर उसका समग्र प्रभाव फिलहाल स्पष्ट नहीं है, क्योंकि कमोडिटी की कीमतों में भारी गिरावट के साथ-साथ रुपये के कमजोर होने से कीमतें बढ़ जाती हैं। उदाहरण के लिए, साल 2020 में कोविड-19 वै​श्विक महामारी के कारण शेयर मूल्य एवं कॉरपोरेट आय में भारी गिरावट के साथ-साथ कच्चे तेल एवं तांबा, एल्युमीनियम, इस्पात आदि औद्योगिक धातुओं की कीमतों में भी भारी गिरावट आई थी।

कच्चे तेल एवं प्राकृतिक गैस, औद्योगिक धातुओं, कृषि और कीमती धातुओं सहित 19 कमोडिटी की कीमतों पर नजर रखने वाला सीआरबी कमोडिटी सूचकांक जनवरी और अप्रैल 2020 के बीच 12.6 फीसदी लुढ़क गया था। उस दौरान ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में भी 58 फीसदी की कमी आई थी। इसके मुकाबले समान अव​धि में निफ्टी50 में 17.6 फीसदी की गिरावट आई और प्रति शेयर आय आधारित ईपीएस सूचकांक 13.3 फीसदी नीचे था। ईपीएस सूचकांक निफ्टी50 में शामिल कंपनियों के एकीकृत शुद्ध लाभ पर नजर रखता है। 

इसी प्रकार कैलेंडर वर्ष 2020 की दूसरी छमाही और 2021 में शेयर मूल्य एवं कॉरपोरेट आय में जबरदस्त तेजी आई थी। मगर उसके साथ-साथ कमोडिटी एवं ऊर्जा की कीमतों में भी उतनी ही बड़ी उछाल दर्ज की गई थी। 

अप्रैल 2020 से अप्रैल 2022 के बीच निफ्टी50 सूचकां में 74 फीसदी की उछाल आई थी जिसे उस दौरान ईपीएस सूचकांक में 51 फीसदी की वृद्धि से दम मिला था। उस दौरान सीआरबी कमोडिटी सूचकांक में 82 फीसदी, ब्रेंट क्रूड में 350 फीसदी और लंदन मेटल एक्सचेंज सूचकांक में 102 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई थी।

कोविड महामारी के बाद कमोडिटी की कीमतों में जबरदस्त तेजी आई जिससे समग्र कॉरपोरेट आय में भारी वृद्धि दर्ज की गई। टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील, कोल इंडिया, एनएमडीसी, रिलायंस इंडस्ट्रीज और ओएनजीसी जैसी कंपनियां वित्त वर्ष 2022 में सबसे अ​धिक मुनाफा कमाने वाली कंपनियों में शुमार रहीं। 

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First Published - April 8, 2025 | 10:21 PM IST

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