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यूक्रेन जंग: खौले खाद्य तेल

Last Updated- December 11, 2022 | 8:51 PM IST

रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से देश में खाद्य तेलों के दाम बढऩे लग गए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेलों में भारी तेजी देखी जा रही है। देश में भी इस तेजी और होली की मांग के कारण मांग बढऩे से खाद्य तेलों की महंगाई को बल मिला है। देश में भी कीमतें बढऩे को लेकर फैली अफवाह की वजह से लोग खाद्य तेलों की अधिक खरीदारी करने लगे हैं। भारत रूस और यूक्रेन से 90 प्रतिशत से अधिक सूरजमुखी के तेल का आयात होता है। इस तेल के दाम सबसे ज्यादा बढ़े हैं। सरसों तेल के दाम नरम पड़े हैं। क्योंकि इस साल मंडियों में आ रही सरसों की नई फसल की बंपर पैदावार है।
बीते दो सप्ताह के दौरान थोक बाजार में आयातित तेलों में आरबीडी पामोलीन के दाम 130 रुपये से बढ़कर 157 रुपये, कच्चे पाम तेल के दाम 128 रुपये से बढ़कर 162 रुपये प्रति किलो हो गए हैं। देसी तेलों में सोयाबीन रिफाइंड के दाम 131 रुपये से बढ़कर 160 रुपये, सूरजमुखी तेल के दाम 130 रुपये से बढ़कर 165 रुपये, मूंगफली तेल के दाम 135 रुपये से बढ़कर 157 रुपये प्रति किलो हो गए हैं। जबकि सरसों तेल के दाम 165 रुपये से घटकर 152 रुपये प्रति किलो रह गए हैं।
दिल्ली खाद्य तेल संघ के सचिव हेमंत गुप्ता ने बताया कि भारत खाद्य तेलों के आयात पर काफी निर्भर है। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण मुख्य खाद्य तेल उत्पादक देश मलेशिया और इंडोनेशिया ने इनके दाम बढ़ा दिए हैं। युद्ध के कारण यूक्रेन से देश में सूरजमुखी तेल की आपूर्ति थम गई है। देश में 80 फीसदी से ज्यादा हर माह करीब 2 लाख टन सूरजमुखी तेल यूक्रेन से ही आता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेलों के दाम बढऩे का असर घरेलू तेलों की कीमतों पर भी पड़ा है। दो सप्ताह के दौरान देसी तेलों के दाम 20 से 30 रुपये किलो बढ़ गए हैं। हालांकि बीते दो-तीन दिन में मुनाफावसूली के कारण कीमतें दो-तीन रुपये किलो घटी हैं। खाद्य तेल कारोबारी सुरेश अग्रवाल ने कहा कि युद्ध के कारण ज्यादातर खाद्य तेल महंगे होने के बीच सरसों तेल की कीमतों में नरमी का रुख है। क्योंकि मंडियों में नई सरसों की आवक होने लगी है और इस साल सरसों की बंपर पैदावार है। तेल उद्योग के मुताबिक इस साल 115-120 लाख टन सरसों पैदा होने का अनुमान है। पिछले साल 85 से 90 लाख टन सरसों पैदा हुई थी। हालांकि सरकारी अनुमान के मुताबिक इस साल करीब 115 लाख टन सरसों उत्पादन होगा, जबकि पिछले साल उत्पादन करीब 102 लाख टन था। खाद्य तेल कारोबारियों का कहना है फिलहाल खाद्य तेलों की महंगाई ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। इंडिया इन्फोलाइन के उपाध्यक्ष (अनुसंधान) अनुज गुप्ता ने बताया कि रूस-यूक्रेन जंग से खाद्य तेल महंगे हुए हैं और होली की मांग को देखते हुए इस माह खाद्य तेल महंगे ही रहने की संभावना है।

First Published - March 8, 2022 | 11:12 PM IST

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