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बेमौसम बारिश का कहर: गेहूं उत्पादन और गुणवत्ता पर खतरा, खरीद मानकों में मिल सकती है ढील

केडिया स्टॉक व कमोडिटी रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड के मुताबिक मार्च और अप्रैल में हुई बारिश और ओलावृष्टि ने कई क्षेत्रों में फसल पर 3 से लेकर 25 फीसदी तक नुकसान की सूचना है

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रामवीर सिंह गुर्जर   
Last Updated- April 10, 2026 | 7:41 PM IST

Rain impact wheat crop: बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से रिकॉर्ड गेहूं उत्पादन की उम्मीद पर पानी फिर सकता है। मार्च अप्रैल के दौरान देश के कई हिस्सों में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं उत्पादन घटने का अंदेशा है। साथ ही गेहूं की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। जिससे किसानों को इसे सरकारी खरीद केंद्रों पर बेचने में दिक्कत हो सकती है। ऐसे में किसानों को राहत देने के लिए सरकार गेहूं खरीद मानकों में ढील दे सकती है।

बेमौसम बारिश से गेहूं को कितना नुकसान?

केडिया स्टॉक व कमोडिटी रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड के मुताबिक मार्च और अप्रैल में हुई बारिश और ओलावृष्टि ने कई क्षेत्रों में फसल पर 3 से लेकर 25 फीसदी तक नुकसान की सूचना है। खासकर जहां फसल पककर तैयार थी या कटाई के चरण में थी, वहां क्षति अधिक हुई है। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार के कई इलाकों में खड़ी फसल का 25 से 30 फीसदी हिस्सा प्रभावित हुआ है।

खेतों में फसल गिरने, दानों के सिकुड़ने और दानों की चमक कम होने की शिकायतें सामने आई हैं। गेहूं के उत्पादन में 5 से 10 फीसदी गिरावट आने का अंदेशा है। सरकार ने 12.02 करोड़ टन गेहूं के रिकॉर्ड उत्पादन का अनुमान लगाया था, लेकिन 9 राज्यों के 111 जिलों में नुकसान की रिपोर्ट के बाद वास्तविक उत्पादन इस अनुमान से कम रहने की आशंका बढ़ गई है।

इस बीच, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को कहा कि बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से अब तक 2.49 लाख हेक्टेयर में खड़ी रबी फसलों को नुकसान पहुंचा है, जिसमें सबसे अधिक गेहूं की खेती प्रभावित हुई है। चौहान ने कहा कि असामान्य मौसम और ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान का तीन विभागों की ओर से सर्वेक्षण किया जा रहा है। राज्य सरकारों से भी तुरंत नुकसान का आकलन करने को कहा गया है।

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किसानों को खरीद मानकों में मिल सकती है ढील

केडिया स्टॉक व कमोडिटी रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड के अनुसार उत्पादन में संभावित गिरावट के साथ-साथ गुणवत्ता का मुद्दा भी बाजार के लिए चिंता का विषय बन गया है। प्रभावित क्षेत्रों में लगभग 30 फीसदी गेहूं उप-मानक (सबस्टैंडर्ड) गुणवत्ता का बताया जा रहा है, जिससे आटा मिलिंग और बाजार कीमतों पर असर पड़ सकता है। हालांकि करीब 51 जिलों में नुकसान अपेक्षाकृत कम (3–5 फीसदी) दर्ज किया गया है।

हालात को देखते हुए कई राज्यों ने फेयर एवरेज क्वालिटी (FAQ) मानकों में ढील की मांग की है, ताकि प्रभावित गेहूं की भी सरकारी खरीद संभव हो सके और किसानों को नुकसान से बचाया जा सके। हालांकि इस बीच केंद्र सरकार ने राजस्थान में गेहूं खरीद के लिए गुणवत्ता मानकों में ढील दी है। राजस्थान में अब 50% तक चमकहीन और 15% तक सिकुड़े/टूटे दानों वाले गेहूं की सरकारी खरीद एमएसपी पर हो सकेगी। राजस्थान सरकार में मंत्री हीरालाल नागर ने अपने एक्स अकाउंट पर इस बात की जानकारी दी है। हालांकि केंद्र सरकार की ओर से इसकी अधिसूचना आना अभी बाकी है।

First Published : April 10, 2026 | 7:38 PM IST