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तेल उत्पादन बढ़ाने का आग्रह

Last Updated- December 11, 2022 | 9:36 PM IST

तेल उत्पादक कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने की खातिर मनाने के लिए भारत ने फिर से राजनयिक विकल्प का इस्तेमाल करना आरंभ कर दिया है ताकि बढ़ती तेल कीमतों को शांत किया जा सके। आज ब्रेंट क्रूड तेल कीमतें 90 डॉलर के पार पहुंच गई। 2014 के बाद ऐसा पहली बार हुआ है। कच्चे तेल के व्यापार के लिए ब्रेंट सर्वाधिक प्रचलित बाजार है। दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय तौर पर बेचे जाने वाले कच्चे तेल की दो तिहाई के लिए यह बेंचमार्क की तरह इस्तेमाल किया जाता है।
इन ऊंची कीमतों का मतलब है कि तेल विपणन कंपनियों पर घरेलू वाहन ईंधन कीमतों में इजाफा करने का दबाव है। ऐसा लगता है कि पांच राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनावों के मद्देनजर वाहन ईंधन में बढ़ोतरी को रोक कर रखा गया है।     
इसी हफ्ते पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने तेल संपन्न देश संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की राष्ट्रीय तेल कंपनी अबु धाबी नैशनल ऑयल कंपनी (एडीएनओसी) के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी सुल्तान अल जाबेर से फोन पर बात की थी। पुरी ने ट्िवट कर कहा कि उन दोनों के बीच द्विपक्षीय ऊर्जा साझेदारी से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। पुरी ने यूएई में हुए आतंकी घटना की भी निंदा की जिसमें दो भारतीयों की मौत हो गई थी।
इस मामले से अवगत अधिकारियों ने कहा कि ये कॉल उन उपायों में शामिल है जिनकी बदौलत भारत कच्चा तेल उत्पादक देशों को उत्पादन बढ़ाने और कीमतें कम करने के लिए मना रहा है। अगले हफ्ते 2 फरवरी को पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) की 25वीं ओपेक और गैर-ओपेक मंत्री स्तरीय बैठक होने वाली है। उम्मीद की जा रही है कि इस बैठक में यह निर्णय लिया जाएगा कि तेल उत्पादक देश उत्पादन बढ़ाएंगे अथवा नहीं। चूंकि ओपेक एक अंतरराष्ट्रीय उत्पादक संघ के तौर पर कार्य करता है लिहाजा तेल उत्पादक देशों ने वैश्विक उत्पादन घटाने का निर्णय लिया जिससे कि दाम बढ़ाकर अधिक लाभ अर्जित किया जा सके।   
बुधवार को कच्चे तेल के भारतीय बास्केट की कीमत 88.23 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। लेकिन कच्चे तेल की कीमत में इजाफे के बावजूद सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) वाली तीन कंपनियों इंडियन ऑयल (आईओसीएल), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (एचपीसीएल) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (बीपीसीएल) ने 4 नवंबर, 2021 के बाद से पेट्रोलियम उत्पाद के दाम ें कोई बदलाव नहीं किया है। नवंबर 2021 में कच्चे तेल के भारतीय बास्केट की औसत कीमत 80.64 डॉलर प्रति बैरल रही थी।
इन तीन पीएसयू तेल विपणन कंपनियों में से एक के अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, ‘फिलहाल हमें उत्पाद की बिक्री पर नुकसान उठाना पड़ रहा है।’ उन्होंने कहा, ’90 डॉलर प्रति बैरल का असर 15 दिन में ज्यादा अधिक नजर आने लगेगा।’
लेकिन तब उस दौरान विधानसभा चुनाव हो रहे होंगे और उम्मीद की जा रही है कि कंपनियां ईंधनों की बिक्री पर नुकसान झेलना जारी रखेंगी क्योंकि तब केंद्र उन्हें पेट्रोल और डीजल कीमतों में वृद्घि जैसे किसी भी राजनीतिक तौर पर नुकसानदेह कदम को रोकने की सलाह देगा।       
कच्चे तेल की कीमत अधिक होने का मतलब यह भी है कि रसोई गैस (एलपीजी) भी महंगी हो जाएगी। 6 अक्टूबर, 2021 के बाद से घरेलू एलपीजी सिलिंडरों के दाम में भी बदलाव नहीं किया गया है। 

First Published - January 27, 2022 | 11:22 PM IST

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