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गेहूं की कीमतों में गिरावट के आसार

Last Updated- December 10, 2022 | 7:25 PM IST

लोकसभा चुनाव के बाद निर्यात की इजाजत के बावजूद गेहूं की कीमतों में गिरावट के आसार है। अप्रैल माह तक गेहूं के दाम में 1 रुपये प्रति किलोग्राम की कमी आ सकती है।
बंपर नयी फसल एवं मजबूत स्टॉक के कारण सरकार के इस फैसले से गेहूं की कीमत में कोई तेजी भी दर्ज नहीं की गयी है। इस साल देश में 7.85 करोड़ टन गेहूं उत्पादन का अनुमान है। चुनाव के बाद 20 लाख टन गेहूं निर्यात की संभावना है।
गेहूं के थोक कारोबारियों के मुताबिक इस साल पिछले साल की तरह ही गेहूं की बंपर फसल की उम्मीद है। सरकारी गोदामों में गेहूं का स्टॉक बीते पांच सालों के मुकाबले अपने अधिकतम स्तर पर है। सरकार के पास फिलहाल 195 लाख टन से अधिक गेहूं का स्टॉक है।
कारोबारी कहते हैं कि सरकार ने ऐसे समय के लिए निर्यात की इजाजत दी है जब गेहूं की नयी फसल की आवक अपने चरम पर होगी। लोक सभा चुनाव का परिणाम 16 मई को घोषित होगा तब तक बाजार में अधिकतम फसल की आवक हो जाएगी। ऐसे में अप्रैल माह के दौरान गेहूं की कीमत में कम से कम 1 रुपये प्रति किलोग्राम की गिरावट आ सकती है।
गेहूं उत्पादन में अव्वल पंजाब में गेहूं की नयी फसल की आवक हर हाल में चुनाव परिणाम से पहले तकरीबन पूरी हो जाएगी। कारोबारी कहते हैं कि किसानों को सही कीमत दिलाने के लिए गेहूं का नया न्यूनतम समर्थन मूल्य 1080 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है।
उत्पादन व स्टॉक की मात्रा को देखते हुए सरकारी खरीद के अलावा खुले बाजार में नाममात्र की गेहूं खरीदारी होने की संभावना है। दिल्ली ग्रेन मर्चेंट के कारोबारियों ने बताया कि वे पिछले आठ-नौ महीनों से एक समान कीमत (1150-1200 रुपये प्रति क्विंटल) पर गेहूं की बिक्री कर रहे हैं।
गत अप्रैल माह में इन व्यापारियों ने 1100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं की खरीदारी की थी और ढुलाई खर्च जोड़कर तकरीबन प्रति क्विंटल 1150 रुपये की दर बैठती है। दूसरी तरफ सरकार आटा बनाने वाली मिलों को सस्ती दरों से गेहूं बेच रही है। इस नाम पर बाजार में भारी मात्रा में सरकारी गेहूं की आवक हो रही है।
नाम नहीं छापने की शर्त पर वे कहते हैं कि सरकार अपने गोदामों को खाली करने के लिए आटे के नाम पर गेहूं की जमकर आपूर्ति कर रही है। कारोबारी कहते हैं कि तत्काल रूप से निर्यात खुलने से कीमत में बढ़ोतरी हो सकती थी और ऐसा नहीं होता तो कम से कम कीमत में गिरावट की स्थिति तो नहीं ही बनती।
हालांकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इस साल गेहूं की फसल अप्रैल के आखिर में तैयार होगी। इस साल गन्ने की कटाई में हुई देरी के कारण इन इलाकों में गेहूं की बुवाई दिसंबर आखिर तक हुई है। कारोबारी यह भी सवाल उठा रहे हैं कि नयी सरकार के गठन के बाद निर्यात को लेकर क्या फैसला होगा, इस बात को लेकर भी अभी असमंजस की स्थिति है।
नाकाम कोशिश
अप्रैल माह तक गेहूं के दाम में आ सकती है 1 रुपये प्रति किलो की कमी
सरकार द्वारा 20 लाख टन गेहूं निर्यात की इजाजत से भी नहीं आई कीमतों में मजबूती

First Published - March 9, 2009 | 5:12 PM IST

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