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तेल नरम, गेहूं-सोयाबीन पर दबाव; हॉर्मुज और ईरान समझौते पर टिकी बाजार की नजर

अमेरिका-ईरान समझौते और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के सामान्य होने की उम्मीदों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई है।

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देवव्रत वाजपेयी   
Last Updated- June 15, 2026 | 9:00 AM IST

US-Iran Deal: आमतौर पर गेहूं और सोयाबीन की कीमतें मौसम, फसल और मांग पर निर्भर करती हैं। लेकिन इस बार हजारों किलोमीटर दूर पश्चिम एशिया में चल रहे घटनाक्रम ने इन फसलों के दाम पर असर डाल दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की उम्मीद और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने की खबरों के बाद गेहूं और सोयाबीन दोनों की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है।

गेहूं के दाम दो महीने के निचले स्तर पर

केडिया एडवाइजरी की रिपोर्ट के मुताबिक, गेहूं की कीमतें गिरकर करीब 5.80 डॉलर प्रति बुशल पर पहुंच गई हैं, जो 10 अप्रैल के बाद का सबसे निचला स्तर है। बाजार को उम्मीद है कि अगर हॉर्मुज जलडमरूमध्य सामान्य रूप से खुल जाता है, तो खाद और ईंधन की सप्लाई आसान होगी। इससे किसानों की लागत कम हो सकती है और उत्पादन बढ़ सकता है। ज्यादा उत्पादन का मतलब है बाजार में ज्यादा सप्लाई, इसलिए अभी से कीमतों पर दबाव देखने को मिल रहा है।

रिपोर्ट का कहना है कि हालांकि दूसरी तरफ अमेरिका में सूखे की समस्या बनी हुई है। इसी वजह से अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) ने शीतकालीन गेहूं उत्पादन का अनुमान पिछले महीने के मुकाबले 2 फीसदी घटा दिया है। फसल की हालत भी कुछ खास नहीं है। केवल 25 फीसदी फसल को अच्छी या उत्कृष्ट श्रेणी में रखा गया है, जो इस समय के लिए रिकॉर्ड निचले स्तर पर है।

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सोयाबीन भी 4 महीने के निचले स्तर के करीब

सोयाबीन की कीमतें भी 11.2 डॉलर प्रति बुशल से नीचे बनी हुई हैं और करीब चार महीने के निचले स्तर पर कारोबार कर रही हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट है। जब तेल सस्ता होता है तो बायोफ्यूल की मांग कमजोर पड़ने की आशंका बढ़ जाती है। चूंकि सोयाबीन का इस्तेमाल बायोफ्यूल बनाने में भी होता है, इसलिए इसका सीधा असर सोयाबीन की कीमतों पर पड़ता है।

अच्छी फसल और बढ़ी सप्लाई का दबाव

रिपोर्ट का कहना है कि सोयाबीन बाजार पर दबाव सिर्फ तेल की वजह से नहीं है। अमेरिका में मौसम फिलहाल फसल के लिए अनुकूल बना हुआ है, जिससे अच्छी पैदावार की उम्मीद बढ़ी है। वहीं दक्षिण अमेरिका से भी सप्लाई मजबूत रहने के संकेत मिल रहे हैं। अमेरिकी कृषि विभाग ने अर्जेंटीना के सोयाबीन उत्पादन का अनुमान बढ़ाकर 5 करोड़ टन कर दिया है। इससे बाजार को लग रहा है कि आने वाले महीनों में वैश्विक स्तर पर सोयाबीन की कोई कमी नहीं रहने वाली।

चीन की मांग भी बनी चिंता

सोयाबीन बाजार के लिए एक और चिंता चीन की कमजोर मांग है। चीन दुनिया का सबसे बड़ा सोयाबीन आयातक है, लेकिन हाल के महीनों में उसकी खरीदारी सुस्त रही है। इसके अलावा अमेरिका में कई प्रोसेसिंग प्लांट मरम्मत और रखरखाव के काम में लगे हैं, जिसके चलते सोयाबीन की प्रोसेसिंग गतिविधियां भी धीमी पड़ गई हैं।

रिपोर्ट का कहना है कि फिलहाल कमोडिटी बाजार की नजर अमेरिका-ईरान समझौते और हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर टिकी हुई है। अगर समझौता आगे बढ़ता है और तेल की कीमतों में नरमी बनी रहती है, तो गेहूं और सोयाबीन दोनों की कीमतों पर दबाव जारी रह सकता है। हालांकि मौसम और फसल की स्थिति में किसी भी बड़े बदलाव से बाजार का रुख पलट भी सकता है।

First Published : June 15, 2026 | 9:00 AM IST