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कृषि में उत्सर्जन घटाने की रणनीति पर काम

Last Updated- December 11, 2022 | 11:41 PM IST

सीओपी26 जलवायु शिखर सम्मेलन के पहले सप्ताह के समापन पर शनिवार को सतत कृषि कार्य एजेंडे पर हस्ताक्षर करने वाले 27 देशों में भारत भी शामिल हो गया है, जिसे देखते हुए अधिकारियों का कहना है कि केंद्र व राज्य दोनों सरकारें प्रतिबद्धता पूरी करने के लिए विभिन्न विकल्पों पर काम कर रही हैं। इसका मकसद देश में कृषि क्षेत्र को कम प्रदूषणकारी और ज्यादा सतत बनाना है।
देश में कृषि क्षेत्र की सालाना ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी 14 प्रतिशत है, जिसमें से करीब 55 प्रतिशत सिर्फ पशुधन क्षेत्र से होता है। अध्ययनों से पता चलता है कि 2019 में भारत में सीओ 2 का उत्सर्जन  25,974 लाख टन था। पिछले 50 वर्षों में उत्सर्जन उल्लेखनीय रूप से बढ़कर 2,328 लाख टन से बढ़कर 25,974 लाख टन हो गया है। सालाना उत्सर्जन दर सबसे ज्यादा 2009 में 11.65 प्रतिशत बढ़ा है, लेकिन 2019 में इसमें 1.6 प्रतिशत की कमी आई है।
हाल के सीओपी 26 सम्मेलन में भारत ने कुल मिलाकर कार्बन उत्सर्जन 2030 तक घटाकर 1 अरब टन करने की प्रतिबद्धता जताई है। इसका एक हिस्सा कृषि का होगा क्योंकि यह क्षेत्र देश के 5 प्रमुख उत्सर्जकों में से एक है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, ‘काम कई प्रारूपों और तरीकों में किया जाना है, जिससे कृषि क्षेत्र के जीएचजी उत्सर्जन में कमी आ सके। इसमें शोध और खेतोंं में पर्यावरण के प्रति अनुकूल बीजों व उनकी किस्मों का विकास, पर्यावरण के अनुकूल कृषि गतिविधियां, मृदा प्रबंधन, धान जैसी फसलों का विविधीकरण जिनमें कम पानी का इस्तेमाल हो, कम पानी की जरूरत वाली धान के बीजों का विकास, कृषि अवशेष को जलाने में कमी लाया जाना शामिल है।’
उन्होंने कहा कि अगर पशुधन की बात करें तो सरकार पशुओं के आश्रय के प्रबंधन में सुधार पर काम कर रही है, जिससे अवशेष का बेहतर तरीके से शोधन हो सके, साथ ही पशुओं को ज्यादा संतुलित चारा मिल सके और मीथेन का उत्सर्जन कम हो।
सस्टेनेबल एग्रीकल्चर पॉलिसी एक्शन एजेंडा फॉर द ट्रांजिशन टू सस्टेनेबल एग्रीकल्चर ऐंड ग्लोबल एक्शन एजेंडा फॉर इनोवेशन इन एग्रीकल्चर शनिवार को जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यूएनएफसीसीसी) के 26वें कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज (सीओपी26) में भाग लेने वाले देशों द्वारा किए जाने वाले प्रमुख कार्य संकल्पों में से एक है।
देशों ने कृषि को अधिक स्थाई और कम प्रदूषणकारी बनने के लिए अपनी कृषि नीतियों को बदलने और सतत कृषि तथा जलवायु परिवर्तन से खाद्य आपूर्ति की रक्षा के लिए आवश्यक विज्ञान (प्रोद्यौगिकी) में निवेश करने के लिए नई प्रतिबद्धताएं निर्धारित कीं।
भारत के अलावा इस कार्य योजना पर हस्ताक्षर करने वाले देशों में ऑस्ट्रेलिया, युगांडा, मेडागास्कर, तंजानिया, वियतनाम, नाइजीरिया, लेसोथो, लाओस, इंडोनेशिया, गिनी, घाना, जर्मनी, फिलीपींस, इथियोपिया, ब्रिटेन, कोलंबिया, कोस्टा रिका, मोरक्को, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, नाइजीरिया, सिएरा लियोन, स्पेन, स्विट्जरलैंड और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं।
प्रतिबद्धताओं मेंं ब्राजील द्वारा एबीसी प्लस कम कार्बन वाली खेजी की योजना और 2030 तक 1 अरब टन उत्सर्जन घटाना, जर्मनी द्वारा 2030 तक कृषि में उत्सर्जन 250 लाख टन करना, ब्रिटेन में 75 प्रतिशत किसानों को कम उत्सर्जन के लक्ष्य में लगाया जाना शामिल है।
बहरहाल जहां तक भारत सका संबंध है, अधिकारियों ने कहा कि अब तक किसी निश्चित प्रतिबद्धता को लेकर स्थिति साफ नहीं है। एक अन्य अधिकारी ने कहा, ‘मुझे यह जानकारी नहीं है कि कोई खास प्रतिबद्धता की गई है। भारत में प्राथमिक रूप से छोटे किसान खेती करते हैं और और हम उनके हितों को ध्यान में रखकर काम करते हैं।’
महाराष्ट्र को जलवायु कार्रवाई पुरस्कार मिला
महाराष्ट्र को उसके जलवायु कार्रवाई प्रयासों के लिए स्कॉटलैंड में सीओपी-26 शिखर सम्मेलन के इतर अंतरराष्ट्रीय गैर-लाभकारी जलवायु समूह के अंडर 2 गठबंधन के लीडरशिप अवार्ड के तहत प्रेरक क्षेत्रीय नेतृत्व पुरस्कार मिला है। राज्य के पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे ने शनिवार शाम स्कॉटलैंड के स्टर्लिंग कैसल में पुरस्कार प्राप्त किया। भाषा

First Published - November 8, 2021 | 11:23 PM IST

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