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भारत में ही बनेंगे 12 फीसदी आईफोन!

Last Updated- December 11, 2022 | 3:40 PM IST

 ऐसे समय में जब ऐपल ने एक साल तक आपूर्ति-श्रृंखला की ​स्थिरता से जूझने के बावजूद अपने नए प्रमुख उत्पादों की श्रृंखला समय पर ​डिलिवर कर दी है, ऐसे में वर्ष 2025-26 (वित्त वर्ष 26) तक वैश्विक स्तर पर ऐपल इंक के वेंडरों द्वारा निर्मित आईफोन के फ्री-ऑन-बोर्ड (एफओबी) मूल्य में कम से कम 12 प्रतिशत योगदान भारत का हो सकता है। 
यह आंकड़े क्यूपर्टिनो ​स्थित इस कंपनी की चीन पर अधिक निर्भरता में होने वाला महत्त्वपूर्ण बदलाव दिखाते हैं, जहां अब भी इसके 95 प्रतिशत फोन बनाए जा रहे हैं।
भारत का बढ़ता महत्त्व इस बात से भी देखा जा सकता है कि उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के पहले वर्ष (महामारी की वजह से इस योजना को एक वर्ष तक बढ़ा दिया गया था) 2021-22 (वित्त वर्ष 22) में देश में निर्मित आईफोन का एफओबी मूल्य 1.75 अरब डॉलर था, जो वैश्विक मूल्य से दो प्रतिशत से भी कम है।
एफओबी आयातित और निर्यातित वस्तुओं का मूल्यांकन निर्धारित करने के लिए माल ढुलाई का मूल्य बताता है। इसमें एक्स-फैक्टरी मूल्य और अन्य लागत शामिल रहती हैं। इसमें शिपिंग, विपणन और बिक्री व्यय तथा कर शामिल नहीं होते हैं। विश्लेषकों का कहना है कि ऐपल आईफोन के मामले में इनके बिक्री मूल्य में तकरीबन आधा हिस्सा एफओबी का रहता है।
हालांकि यह बदलाव इस बात पर निर्भर करेगा कि भारत में ऐपल इंक के वेंडर सरकार की पीएलआई योजना के तहत अपने द्वारा निर्मित फोन के वृद्धिशील उत्पादन के वास्ते एफओबी मूल्य की अपनी न्यूनतम प्रतिबद्धता पूरी कर पाते हैं या नहीं।
सरकार के सामने पेश किए गए आंकड़ों के आधार पर तीन वेंडरों – होन हाई टेक्नोलॉजी ग्रुप (फॉक्सकॉन), विस्ट्रॉन और पेगाट्रॉन  ने सामूहिक रूप से भारत में वित्त वर्ष 26 तक (पीएलआई योजना के आ​खिरी साल तक) कम से कम 15 अरब डॉलर के एफओबी मूल्य के आईफोन निर्माण के लिए प्रतिबद्धता जताई है।
हालांकि इस संबंध में जानकारी रखने वाले सूत्रों के अनुसार वेंडर अ​धिक एफओबी मूल्य का फोन उत्पादन कर सकते हैं (अगर अन्य पात्र भागीदार इस प्रोत्साहन का दावा करने में असमर्थ रहते हैं) जो 30 अरब डॉलर तक जा सकता है।
कंपनी के करीबी सूत्रों का कहना है कि यह मानकर कि दुनिया भर में बेचे जाने वाले आईफोन का कुल मूल्य वित्त वर्ष 26 में बढ़कर 250 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा (जो सितंबर 2021 को समाप्त वित्त वर्ष में 192 अरब डॉलर था), तो इसमें भारत का योगदान करीब 12 प्रतिशत होगा। अगर यह हिस्सेदारी 30 अरब डॉलर के आसपास पहुंच जाता है, तो यह हिस्सेदारी काफी ज्यादा (20 प्रतिशत से ज्यादा) रह सकती है। हालांकि इस संबंध में  ऐपल इंक को भेजे गए सवालों का कोई जवाब नहीं मिला।
पीएलआई योजना के तहत पात्र कंपनियों को उनके उत्पादन मूल्य पर पांच साल के लिए चार से छह प्रतिशत की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इन प्रोत्साहनों को चीन और वियतनाम के मुकाबले भारत में फोन निर्माण की लागत का अंतर कम करने के लिए तैयार किया गया है, ताकि उनका निर्यात किया जा सके।
वित्त वर्ष 22 में ऐपल इंक के पास फोन निर्माण करने वाले केवल दो ही वेंडर थे – होन हई और विस्ट्रॉन।
 

First Published - September 12, 2022 | 10:07 PM IST

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