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अदाणी को बंदरगाह के लिए बोली लगाने की अनुमति

Last Updated- December 11, 2022 | 3:55 PM IST

 उच्चतम  न्यायालय ने देश की सबसे बड़ी पोर्ट डेवलपर और ऑपरेटर अदाणी पोर्ट्स ऐंड स्पेशल इकनॉमिक जोन (एपीएसईजेड) को बड़ी राहत दी है। न्यायालय ने आज कहा कि एपीएसईजेड सार्वजनिक निकायों द्वारा जारी टेंडरों में हिस्सा ले सकती है, जो सरकारी बंदरगाह परियोजनाओं के टेंडर को लेकर कई अपात्रताओं का सामना कर रही है।
न्यायमूर्ति एमआर शाह और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी के पीठ ने कहा कि आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय  का फैसला अदाणी पोर्ट्स को भविष्य की सार्वजनिक बोलियों में भाग लेने से नहीं रोकेगा। अदाणी पोर्ट्स को नवी मुंबई स्थित जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी कंटेनर टर्मिनल के उन्नयन के लिए बोली के अपात्र करार दिया गया था। यह अपात्रता जेएनपीए के टेंडर की एक धारा के आधार पर की गई थी।
अगर किसी  कंपनी का पिछले 3 साल के दौरान किसी सार्वजनिक इकाई के साथ समझौता रद्द हुआ है या उसे अपात्र करार दिया गया है तो वह बोली में हिस्सा नहीं ले सकेगी। जेएनपीटी ने इस धारा का हवाला देते हुए कहा कि वीपीटी के साथ कॉन्ट्रैक्ट रद्द होने के कारण अदाणी पोर्ट्स स्वतःस्फूर्त मुंबई के जेएनपीए में बोली के लिए अपात्र हो जाती है। इस तर्क को खारिज करते हुए उच्चतम न्यायालय ने कहा, ‘वीपीटी द्वारा टेंडर रद्द किए जाने से पैदा हुई अपात्रता याची को भविष्य के सार्वजनिक निकायों के टेंडर में हिस्सा लेने से नहीं रोकेगी। अपात्रता की धारा को उच्च न्यायालय में चुनौती नहीं दी गई है, इसलिए याची नए सिरे से उच्च न्यायालय में चुनौती दे सकता है।’
 

First Published - September 5, 2022 | 10:28 PM IST

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