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कॉनकॉर में अदाणी की भी भागीदारी

Last Updated- December 11, 2022 | 1:20 PM IST

कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (कॉनकॉर) के विनिवेश के लिए बहुप्रतीक्षित प्री-एक्सप्रेशन ऑफ इंटेरेस्ट (ईओआई) रोडशो के लिए पांच कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई है। इसमें आई स्क्वॉयर्ड कैपिटल, शोजिट्स कॉरपोरेशन, अदाणी समूह, डीपी वर्ल्ड और पीएसए सिंगापुर शामिल हैं। सूत्र बताते हैं कि नवंबर के पहले सप्ताह तक दीपम ईओआई के साथ आने के पूरी तरह तैयार है। 
रोड-शो का आयोजन संभावित निवेशकों को भूमि लाइसेंस शुल्क के बारे में स्पष्टता लाने के लिए किया गया था, जो 2019 में कॉनकॉर विनिवेश प्रक्रिया के लिए प्रमुख बाधाओं में से एक था। एक सूत्र ने बताया, ‘दीपम के अधिकारी, रेल मंत्रालय और कॉनकॉर निवेशकों के सवालों का जवाब देने के लिए बैठक में मौजूद थे। फीडबैक के आधार पर, दीपम नवंबर के पहले सप्ताह तक ईओआई लाने के लिए तैयार है।’
कॉनकॉर के विनिवेश की प्रक्रिया को नवंबर 2019 में मंजूरी दी गई थी और इस आधार पर सरकारी की लगभग 54.8 फीसदी हिस्सेदारी में से निजी हितधारक कंपनी में 30.8 फीसदी हिस्सेदारी ले सकते हैं। 45,755 करोड़ रुपये के मार्केट कैप के आधार पर कंपनी में 30.8 फीसदी की हिस्सेदारी का मूल्य करीब 14,093 करोड़ रुपये है।
इसलिए, चालू वित्त वर्ष के लिए निर्धारित 65,000 करोड़ रुपये के विनिवेश लक्ष्य को पूरा करने के लिए कॉनकॉर को महत्वपूर्ण माना जाता है। 7 सितंबर को, आर्थिक मामले की मंत्रिमंडल समिति (सीसीईए) ने नए आवेदकों  के लिए एलएलएफ दरों को 6 फीसदी से घटा कर भूमि के दर का 1.5 फीसदी करने की मंजूरी दी थी। शुल्क में वार्षिक वृद्धि को पहले के 7 फीसदी से घटाकर 6 फीसदी कर दिया गया था। रेलवे की जमीन में निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए यह फैसला किया गया है।
4 अक्टूबर को एक परिपत्र के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया था कि कार्गो गतिविधियों के लिए रेलवे की जमीन का उपयोग करने वाली सभी संस्थाएं रेलवे की मौजूदा नीतियों द्वारा शासित होंगी। यानी वार्षिक पट्टा/लाइसेंस शुल्क ‘भूमि के बाजार मूल्य’ के 6 फीसदी की दर से शेष पट्टे की अवधि के लिए 7 फीसदी की वार्षिक वृद्धि या 35 वर्ष या पारस्परिक रूप से तय की गई अवधि, इसमें जो भी पहले हो। कंपनी ने 2021-22 में 1062 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया था जो वर्ष 2020-21 के 503 करोड़ रुपये के दुगुने से भी अधिक है। कंपनी की कुल आय भी 2021-22 में 18 फीसदी बढ़कर 7,858 करोड़ रुपये हो गई, इससे पिछले वित्त वर्ष में 6,670 करोड़ रुपये थी। 
 

First Published - October 23, 2022 | 11:13 PM IST

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