कर्मचारियों के वेतन में भारी कटौती किए जाने के दो साल बाद भी पुराने वेतन को बहाल करने में विमानन कंपनियों की विफलता ने उद्योग को एक जबरदस्त संकट में डाल दिया है। हालांकि एयर इंडिया के कर्मचारियों ने 2011 में हड़ताल की थी लेकिन यह पहला अवसर है जब निजी क्षेत्र की विमानन कंपनियों को भी कर्मचारियों से संबंधित समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। इंडिगो लगातार ऐसी दो घटनाओं का सामना करना पड़ा है।
पहली घटना के कारण इंडिगो की करीब 50 फीसदी उड़ानों में देरी हुई क्योंकि बड़ी तादाद में चालक दल के सदस्य बीमारी का बहाना बनाकर छुट्टी पर चले गए थे जबकि वास्तव में उन्होंने प्रतिस्पर्धी विमानन कंपनी में रोजगार के लिए वॉक-इन साक्षात्कार में भाग लेना था। दिल्ली, मुंबई और हैदराबाद में इंडिगो और गो फर्स्ट के टेक्नीशियनों ने भी बीमारी के बहाने के साथ छुट्टी पर चले गए। ऐसे में विमानन कंपनी को अपना परिचालन जारी रखने के लिए अन्य स्थानों से कर्मचारियों को लाने के लिए मजबूर होना पड़ा। स्पाइसजेट के पायलट भी अपने कोविड-पूर्व वेतन की मांग के लिए इसी रणनीति के साथ योजना बना सकते हैं।
विमानन कंपनियां अपनी ओर से इसे हल्के में नहीं ले रही हैं। अप्रैल में इंडिगो ने पांच पायलटों को निलंबित कर दिया था जो इस विमानन कंपनी में कर्मचारियों के किसी संगठित विरोध के खिलाफ कार्रवाई का पहला मामला था। मंगलवार को उसने अपने दो टेक्नीशियनों को बर्खास्तगी पत्र सौंप दिया। गो फर्स्ट ने हड़ताली टेक्नीशियनों को चेतावनी दी है कि यदि वे 24 घंटे के भीतर काम पर नहीं लौटे तो उन्हें नौकरी से निकाल दिया जाएगा। विमानन कंपनियों में कर्मचारी के अचानक लापता होने की खबर के बीच चौतरफा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विमानन नियामक डीजीसीए ने भी पहल की है। नीतिगत तौर पर अधिकतर विमानन कंपनियां यूनियन के गठन की अनुमति नहीं देती हैं। ऐसे में कर्मचारियों ने अपनी मांगों के प्रति प्रबंधन का ध्यान आकर्षित करने के लिए एक साथ छुट्टी पर जाने का निर्णय लिया।
डीजीसीए के प्रमुख अरुण कुमार ने कहा, ‘हम प्रमुख हवाई अड्डों पर नियमित रूप से जांच के लिए दस्ते तैनात कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सभी विमानन कंपनियों के पास सुरक्षित परिचालन के लिए पर्याप्त कर्मचारी उपलब्ध हैं। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है।’ कोविड वैश्विक महामारी का प्रभाव कम होने के साथ ही विमानन उद्योग में तेजी सुधार हुआ है। ऐसे में कर्मचारी अपने कोविड-पूर्व वेतन को बहाल करने की मांग कर रहे हैं। विमानन कंपनियों ने 2020 में कोविड-19 के प्रकोप की रोकथाम के लिए उड़ानों पर रोक लगाए जाने के बाद अपने कर्मचारियों के वेतन में कटौती की थी।
कर्मचारियों का कहना है कि उनका इरादा यात्रियों को असुविधा पहुंचाना नहीं है। उन्होंने कहा कि अब उनके पास कोई अन्य विकल्प नहीं बचा है क्योंकि प्रबंधन ने वेतन बहाल करने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि महंगाई के माहौल ने समस्याओं को कहीं अधिक बढ़ा दिया है।
इंडिगो के हैदराबाद कार्यालय में कार्यरत एक प्रशिक्षु विमान टेक्नीशियन को 2018 में 8,000 रुपये प्रति महीने वेतन के साथ प्रशिक्षु के रूप में नियुक्त किया गया था। एक साल बाद बतौर जूनियर टेक्नीशियन उन्हें 17,500 रुपये प्रति माह वेतन मिलता था। कोविड के प्रकोप के दौरान 2020 में इंडिगो ने उनका वेतन घटाकर 12,000 रुपये प्रति माह कर दिया था और बाद में बढ़ाकर 15,000 रुपये कर दिया गया। उस टेक्नीशियन ने कहा, ‘हमें श्रम मंत्रालय की परिभाषा के तहत कुशल श्रमिक के तौर पर मान्यता दी गई है लेकिन यहां हमें अकुशल श्रमिक से भी कम वेतन मिल रहा है।’
विमानन कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि वे फिलहाल अधिक वेतन नहीं दे सकते हैं क्योंकि उन्हें ईंधन कीमतों में तेजी और मुद्रा विनिमय दर की दोहरी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।