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विमान ईंधन के संशोधित मूल्य निर्धारण से विमान कंपनियों को होगा फायदा

Last Updated- December 11, 2022 | 4:08 PM IST

विमान टरबाइन ईंधन (एटीएफ) के लिए नई मूल्य निर्धारण प्रणाली अगले दो महीनों के भीतर लागू होने के आसार हैं, जिससे घरेलू जेट ईंधन के दामों में कम से कम 15 प्रतिशत तक की कमी आएगी। उद्योग के अधिकारियों ने यह संभावना जताई है। 
 

नागरिक उड्डयन मंत्रालय तथा पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के बीच चर्चा के बाद इस मूल्य निर्धारण नीति में बदलाव किया जा रहा है।
 

भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन और इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन जैसी तेल विपणन कंपनियों ने एमओपीएजी (मीन ऑफ प्लैट्स अरब गल्फ) आधारित मूल्य निर्धारण प्रणाली में जाने का फैसला किया है। उद्योग के एक सूत्र ने कहा कि घरेलू और विदेशी विमान कंपनियों के लिए मौजूदा दोहरी मूल्य निर्धारण प्रणाली के बजाय अब एक समान प्रणाली होगी।
 

एक तेल विपणन कंपनी के सूत्र ने कहा ‘पहले घरेलू और अंतरराष्ट्रीय विमान कंपनियों के लिए अलग-अलग मूल्य निर्धारण हुआ करता था, जो अब समान होगा। परिचालन लागत और मार्जिन सहित प्राइस बिल्डअप में भी पारदर्शिता होगी। यथामूल्य दर के बजाय अब लागत, लॉजिस्टिक और परिचालन एक निश्चित पारदर्शी राशि होगी।’
 

फिलहाल किसी विमान कंपनी के कुल व्यय में ईंधन लागत का हिस्सा 50 प्रतिशत रहता है। पिछले महीने स्पाइसजेट के चेयरमैन अजय सिंह और इंडिगो के मुख्य कार्याधिकारी रोनोजॉय दत्ता ने एटीएफ पर कर घटाने की मांग की थी। विमान कंपनियां घरेलू और अंतरराष्ट्रीय विमान कंपनियों से ली जाने वाली कीमतों में एकरूपता के लिए सरकार से गुजारिश कर रही हैं। एक सूत्र ने कहा कि जहां एक ओर घरेलू विमान कंपनियों के लिए हर पखवाड़े दामों में संशोधन किया जाता है, वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय विमान कंपनियों के लिए महीने में एक बार संशोधन किया जाता है। 
 

एक अधिकारी ने कहा कि आगे चलकर घरेलू विमान कंपनियों के लिए भी महीने में एक बार एटीएफ के दामों में बदलाव होगा। वित्त वर्ष 22 में एटीएफ के दामों में सालाना आधार पर 67 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। 

First Published - August 30, 2022 | 9:49 PM IST

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