कोलकाता उच्च न्यायालय से नॉर्थ इंडिया प्लांटेशन डिविजन (एनआईपीडी)के तहत चाय के 24 बगानों को पुनर्गठित करने की योजना को मंजूरी मिलने से टाटा टी के प्लांटेशन कंपनी से वैश्विक स्तर पर ब्रांडेड पेय कंपनी बनने का रास्ता साफ हो गया है।
इस प्लांटेशन को नया जामा पहनाने के बाद इन्हें अमल्गमेटिड प्लांटेशंस (एपीपीएल)की योजना, रोडमैप बनाने और इस बाजार के लिए कंपनी की छोटी और लंबी अवधि की परियोजनाओं के बारे में टाटा की के प्रबंध निदेशक पर्सी सिगनपोरिया ने बात की हमारी संवाददाता इशिता आयान दत्त से। मुख्य अंश:
न्यायालय से अनुमति मिलने के बाद एनआईपीडी को नया जामा पहनाने का काम पूरा हो गया है?
हमें न्यायालय से अनुमति तो मिल चुकी है। लेकिन अभी इस क्षेत्र में आने के लिए वित्तीय करारों पर काम किया जा रहा है। चाय के दामों में बढ़ोतरी बिल्कुल सही समय पर हुई है इससे इस क्षेत्र में आने का इरादा और मजबूत हुआ है। कीमतों में हो रही इस बढ़ोतरी से शेयरधारकों को आराम मिलेगा और हमारी परियोजना को भी पूरा करने में आसानी होगी।
कंपनी क्या सोच कर प्लांटेशंस को नया रूप देने की योजना बना रही है?
चाय, कॉफी और पानी जैसे पेय पदार्थ हमारे कारोबार के मुख्य आधार हैं। हमारी मौजूदगी भी ज्यादा देशों में नहीं है। हम वैश्विक और स्थानीय ब्रांडों का विस्तार कर अपना उत्पाद पोर्टफोलियो बढ़ाना चाहते हैं।
क्या कंपनी खाद्य पदार्थों के कारोबार में आने की योजना भी बना रही है?
इस संभावना से भी हम इनकार नहीं कर सकते हैं। लेकिन अभी हमने अपनी प्राथमिकता तय नहीं की है। फिलहाल हमारा पूरा ध्यान पेय पदार्थों के विस्तार पर ही है। लेकिन कारोबार को लेकर हम काफी महत्वाकांक्षी हैं और अगर कारोबार के विस्तार के लिए हमें दूसरे क्षेत्रों में आना पड़े तो हम उसके लिए भी तैयार हैं।
चाय उद्योग में आई तेजी को देखते हुए क्या आपको लगता है कि प्लांटेशंस के क्षेत्र से कटने का सही समय है?
हां, बिल्कुल। हमारी प्रतिनिधि शेयर होल्डिंग 100 फीसदी से तेजी से घटकर काफी नीचे आ गई है। लेकिन जहां तक कीमतों की बात है हमने प्लांटेशंस के कारोबार को हमेशा ही दूरी पर रखा है।
एपीपीएल में किन कंपनियों की हिस्सेदारी होगी?
इंटरनेशनल फाइनेंस कॉर्पोरेशन, इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग ऐंड फाइनेंस कॉर्पोरेशन, च्लोबली मैनेज्ड सर्विसेज, टाटा इन्वेसटमेंट कॉर्पोरेशन और टाटा टी कंपनी के शेयरधारक कंपनियां होगी।
क्या टाटा टी प्लांटेशन के क्षेत्र से दूर जाने की नीति के तहत श्रीलंका के वटावाला प्लांटेशंस में अपनी हिस्सेदारी कम करने वाली है?
वटावाला कई क्षेत्रों में कारोबार करती है। एक तरह से मैंने उनके मॉडल से सीखा है कि सिर्फ चाय का कारोबार ही सब कुछ नहीं है। यह कंपनी चाय, पाल्म ऑयल, रबड़ के अलावा और भी कई क्षेत्रों में है।
आपको लगता है कि एपीपीएल मॉडल के जरिए आप उनकी तरह कारोबार कर पाएंगे?
हां। हम भी वटावाला की तर्ज पर ही कुछ क्षेत्रों में कारोबार तो कर ही सकते हैं। वटावाला अब केले के निर्यात, डेयरी फार्मिंग, पीने के पानी की पैकेजिंग, छोटे हाइड्रो पावर संयंत्र के बाजार में भी आने की योजना बना रही है। लेकिन हमें एपीपीएल के कार्यक्षेत्र की जलवायु का भी ध्यान रखना होगा। वटावाला के कई ब्रांड्स भी हैं। मसलन कंपनी की चाय ब्रांड ‘जेस्टा’ श्रीलंका की दूसरी सबसे बड़ी चाय ब्रांड है।
क्या आप एपीपीएल मॉडल के बारे में विस्तार से बता सकते हैं?
चाहें फिशरीज हो, फूलों की खेती हो या और भी कृषि आधारित उत्पादों का कारोबार बिलकुल व्यवसायिक तरीके से किया जाएगा।