वाणिज्य एवं उद्योग मंडल (एसोचैम) ने कहा है कि भारत-अमेरिका परमाणु करार होने की दिशा में देश के ऊर्जा क्षेत्र में लगभग 2,00,000 करोड़ रुपये का निवेश होगा।
एसोचैम के भूतपूर्व अध्यक्ष वेणुगोपाल धूत ने कहा,’आने वाले 15 साल में परमाणु ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में कम से कम 2 लाख करोड़ रुपये का निवेश होने की संभावना है।’ पिछले पांच साल में निर्माण क्षेत्र की विकास दर काफी धीमी रही है। यह 6.6- 8.8 फीसदी के बीच ही रही है।
इसके अलावा इस क्षेत्र की हिस्सेदारी भी संतोषजनक नहीं रही है। साल 1995-96 के 18 फीसदी से घटकर यह आंकड़ा पिछले साल 15.5 फीसदी हो गया था। वीडियोकॉन ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज के प्रबंध निदेशक धूत ने कहा कि वीडियोकॉन, जिंदल पावर और टाटा पावर समेत कम से कम 40 कंपनियों ने सरकार और इस क्षेत्र की विदेशी कंपनियों के साथ भी बातचीत कर रही है।
उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका परमाणु करार होने से अगले 15 साल में 40,000 मेगावाट बिजली का अतिरिक्त उत्पादन होगा। इससे बिजली की कीमतों में कमी आएगी। धूत ने बताया कि 9-10 फीसदी की दर से जीडीपी बढ़ रही है। इसीलिए निर्माण क्षेत्र की विकास दर 15 फीसदी करने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। धूत ऐसोचैम के एक अध्ययन जारी करने के अवसर पर बोल रहे थे।
इस अध्ययन में बताया गया है कि कैसे विदेशी कंपनियां भारत में मौजूद सस्ते श्रम का फायदा उठा सकती हैं। इस अध्ययन में भारत और चीन के औद्योगिक क्षेत्रों की तुलना भी की गई है। टाटा मोटर्स के सिंगुर से हटने के मामले पर उन्होंने कहा कि इस घटना से उद्योग जगत को सीख लेनी चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘कंपनियों को राज्य सरकारों पर अधिग्रहण के लिए दबाव नहीं डालना चाहिए। कंपनियों को किसानों से भी बात करनी चाहिए। राज्य सरकार सिर्फ बुनियादी सुविधाएं मुहैया करा सकती है।’