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एटीएफ शुल्क से विस्तार की होगी सुस्त रफ्तार

Last Updated- December 11, 2022 | 5:46 PM IST

घरेलू विमानन कंपनियां अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए विमानन ईंधन एटीएफ पर लगाए गए 11 फीसदी बुनियादी उत्पाद शुल्क को वापस लेने की मांग की है। तीन सरकारी तेल विपणन कंपनियों में से एक ने शुक्रवार से अतिरिक्त शुल्क को प्रभावी कर दिया है।
विमानन कंपनियों का मानना है कि इस शुल्क के कारण अंतरराष्ट्रीय परिचालन महंगा हो जाएगा और इससे उनकी विस्तार योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। एटीएफ के थोक निर्यात पर 1 जुलाई से 6 रुपये प्रति लीटर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगा दिया गया है। यह विमानन कंपनियों के लिए लागू नहीं होगा। हालांकि एक सरकारी तेल विपणन कंपनी ने 1 जुलाई से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए खरीदे गए ईंधन पर 11 फीसदी बुनियादी उत्पाद शुल्क लगाया है। जबकि विदेशी उड़ानों के लिए यह शुल्क नहीं लगाया गया था।
एक विमानन कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘यह विमानन कंपनियों के लिए बहुत बड़ी नकारात्मक कार्रवाई है। यह हमें विदेशी विमानन कंपनियों के मुकाबले कमजोर स्थिति में ला देगा क्योंकि उन्हें इस शुल्क से छूट मिलती है। किराया बढ़ाना भी आसान नहीं होगा क्योंकि अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर प्रतिस्पर्धा काफी तगड़ी है। हमने नागर विमानन मंत्रालय और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के समक्ष यह मुद्दा उठाया है।’
एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि उन्हें उत्पाद शुल्क के मुद्दे पर सरकार से स्पष्टीकरण का अब भी इंतजार है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर तस्वीर अभी स्पष्ट नहीं है। इस बाबत जानकारी के लिए विमानन कंपनियों को भेजे गए ईमेल का कोई जवाब नहीं आया।
केपीएमजी के कर पार्टनर अभिषेक जैन ने कहा कि 1 जुलाई के निर्णय से घरेलू और विदेशी विमानन कंपनियों के बीच भेदभाव किया गया है। इसलिए इस मुद्दे को विदेशी विमानन कंपनियों और सरकार साथ मिलकर निपटाने की आवश्यकता है।
जैन के अनुसार, सरकार ने भारतीय विमानन कंपनियों द्वारा अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर खपत किए गए एटीएफ को निर्यात के दायरे से बाहर रखा है। इस प्रकार एटीएफ अब बुनियादी उत्पाद शुल्क के दायरे में आता है जो घरेलू मार्गों के लिए लागू है। उन्होंने कहा, ‘इससे विदेशी विमानन कंपनियों के साथ भेदभाव किया गया है जो विदेशी विमान (ईंधन एवं ल्यूब्रिकेंट्स पर कर एवं शुल्क से छूट) अधिनियम 2002 की धारा 3 के तहत इस शुल्क के भुगतान के लिए जिम्मेदार नहीं हैं।’
विमानन कंपनी के कुल परिचालन खर्च में एटीएफ लागत का योगदान करीब 40 फीसदी होता है। एटीएफ की कीमतों में तेजी के कारण विमानन कंपनियों पहले से ही दबाव झेल रही हैं और विमानन कंपनियां कर घटाने के लिए लगातार मांग करती रही हैं। घरेलू एटीएफ कीमतों में जनवरी के बाद 78 फीसदी की वृद्धि हो चुकी है।
(साथ में शाइन जैकब)

First Published - July 6, 2022 | 12:07 AM IST

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