दर्शक संख्या मापने संबंधी चिंताओं के संबंध में ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल ऑफ इंडिया (बार्क) से बाहर निकलने वाली ज़ी मीडिया ने कहा है कि दमदार माप के लिए संस्था को बड़ी संख्या में पीपल मीटर (दर्शकों की संख्या मापने वाले उपकरण) की जरूरत है।
पीपल मीटर ऐसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण होते हैं, जो किसी परिवार की टेलीविजन देखने की आदतों का लेखा-जोखा रखते हैं। बार्क के पास देश में ऐसे 44,000 पीपल मीटर हैं। ज़ी मीडिया ने एक बयान में कहा कि हमने बार-बार यह कहा है कि अगर बार्क ऐसी पैमाइश प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए गंभीर है, जिसमें हेरफेर या छेड़छाड़ नहीं की जा सकती हो, तो पीपल मीटर के बड़े आकार वाले नमूने की जरूरत है।
ज़ी मीडिया, जिसके पास 10 भाषाओं में 14 समाचार चैनल हैं, सात महीने में बार्क से निकलने वाली दूसरी प्रसारक है। मार्च में न्यू डेल्ही टेलीविजन (एनडीटीवी) इसी तरह की चिंताएं उजागर करने के बाद इस माप प्रणाली से बाहर निकल गई थी।
बार्क के अधिकारी टिप्पणी के लिए तत्काल उपलब्ध नहीं हो पाए। अलबत्ता संस्था ने अक्टूबर 2020 और मार्च 2022 के बीच समाचार दर्शकों की संख्या के आंकड़ों की सूचना देने में तकरीबन 18 महीने का विराम लिया था। इसके पीछे मकसद यह था कि इस अवधि का इस्तेमाल अपने नमूना आकार को 44,000 पीपल मीटर से बढ़ाकर 50,000 पीपल मीटर किया जाए। लेकिन उद्योग के विशेषज्ञों ने कहा कि वैश्विक महामारी कोविड-19 ने पीपल मीटर की संख्या बढ़ाने की कोशिशों में बाधा पहुंचाई थी।
संस्था ने समाचार चैनलों के संबंध में दर्शकों की संख्या बताने के अपने तरीके को बदल दिया, जिसमें किसी विशेष सप्ताह में दर्शकों की संख्या तक पहुंचने के लिए चार सप्ताह की रोलिंग एवरेज के आधार पर दर्शकों का अनुमान लगाया गया।
बार्क ने मार्च में कहा था कि इससे आंकड़ों की स्थिरता में सुधार होगा। लेकिन ज़ी मीडिया का कहना है कि रिपोर्टिंग की इस अवसंरचना का कोई मतलब नहीं है। प्रसारक ने कहा कि बार्क की डेटा रिपोर्टिंग की यह नई प्रक्रिया, जो आंकड़ों की पहले की दैनिक/साप्ताहिक रिपोर्टिंग की तुलना में चार सप्ताह की रोलिंग एवरेज है, बड़ी चिंता है।