नई फिल्टर सिगरेट की केरल में पैठ बढ़ती जा रही है। अपनी कम कीमत के कारण ये फिल्टर सिगरेट बीड़ी और सिगरेट बाजारों में छा गई हैं। इन नए फिल्टर सिगरेट ब्रांडों के बारे में पहले कभी सुना भी नहीं गया था।
‘रेगुलर साइज फिल्टर सिगरेट’ के तौर पर जाने जाने वाले इन नए सस्ते ब्रांडों की ज्यादातर सिगरेटों की लंबाई 70 एमएम या इससे कुछ कम होती है। ऐसा माना जा रहा है कि पूरे देश में कई लघु निर्माण इकाइयों द्वारा इनका निर्माण किया जाता है। केरल के सिगरेट बाजार में जगह बना चुके ये सस्ते ब्रांड कई लोकप्रिय कंपनियों के गैर-फिल्टर ब्रांडों को टक्कर दे रहे हैं।
सस्ती फिल्टर सिगरेट का पैकेट 10 रुपये की कीमत पर उपलब्ध है। यह कीमत गैर-फिल्टर सिगरेट के स्वीकृत ब्रांडों की कीमतों से 50 फीसदी कम है। तंबाकू उद्योग से जुड़े एक अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड समाचार पत्र को बताया, ‘अब तक अनसुने रहे ये फिल्टर सिगरेट प्रति 1000 सिगरेट पर 400 रुपये और 800 रुपये के बीच की रेंज में उपलब्ध हैं।
इस सेगमेंट के लिए संबद्ध उत्पाद शुल्क उपकर वैट प्रति 1000 सिगरेटों पर 949.02 रुपये है। इतनी कम बाजार कीमत तभी संभव है जब उत्पाद शुल्क का भुगतान किए बगैर गुप्त रूप से स्टॉक निकाला जा रहा हो।’ उन्होंने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि उत्पाद शुल्क अनियंत्रित होता जा रहा है। लघु इकाइयां अनुमानित रूप से तकरीबन 75 बा्रंडों का उत्पादन करती हैं। इस उद्योग में इनकी भागीदारी तकरीबन 7 फीसदी है।
इन नई सस्ती सिगरेटों के चलन में आ जाने से उत्पाद शुल्क और कर में भारी गिरावट आई है। उत्पाद शुल्क और करों के तौर पर मासिक तौर पर होने वाला नुकसान इस क्षेत्र में लगभग 65 करोड़ रुपये होगा। सिर्फ ऐसा नहीं है कि इन सस्ती सिगरेटों से बड़ी तंबाकू कंपनियों के गैर-फिल्टर सिगरेट ब्रांड ही प्रभावित हुए हैं। इन सिगरेटों की लोकप्रियता की गाज बीड़ी निर्माताओं पर भी पड़ रही है।
दिनेश बीड़ी वर्कर्स सेंट्रल कॉपरेटिव के राजस्व में अचानक कमी आई है। यह कंपनी बीड़ी का निर्माण करती है और केरल में कामकाजी वर्ग में काफी लोकप्रिय रही है। दिनेश बीड़ी वर्कर्स सेंट्रल कॉपरेटिव के चेयरमैन सी. राजन ने कहा, ‘पूरे केरल में इन नए फिल्टर सिगरेट ब्रांडों की बाढ़ आ गई है। आकर्षक पैकेजिंग और फैंसी नाम वाले ये नई सिगरेट बीड़ी पीने वालों को भी लुभा रही हैं।
गैर-फिल्टर सिगरेट का लुत्फ उठाने वाले लोग भी इन फैंसी फिल्टर सिगरेटों की तरफ मुड़ रहे हैं जिसका एक प्रमुख कारण इन नए सिगरेटों का बेहद सस्ता होना भी है।’ बीड़ी उद्योग की खस्ता हालत को बयां करते हुए राजन कहते हैं, ‘तीन महीने में हमें बड़ा झटका लगा है। बिक्री कम होने से तकरीबन 100,000 बीड़ियों के 500 बोरे पड़े हुए हैं।’