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चीनी फोन कंपनियों को बढ़ाना होगा भारत से निर्यात

Last Updated- December 11, 2022 | 4:26 PM IST

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने मोबाइल फोन बनाने वाली चीनी कंपनियों को भारत से निर्यात बढ़ाने का निर्देश दिया है। उनसे मूल्य संवर्द्धन बढ़ाने के लिए देश में अपनी आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने के लिए भी कहा गया है। सूत्रों के अनुसार ओपो जैसी कुछ कंपनियां पहले ही इसकी योजना बना रही हैं।
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अ​धिकारी ने कहा ‘हां, हमने चीन के उपकरण विनिर्माताओं को एक साथ बिठाकर और अलग-अलग बिठाकर बैठकें की हैं, जिनमें उनसे भारत के निर्यात में भागीदारी करने के लिए कहा गया है। उन्हें बताया गया है कि हमारा 2026 तक मोबाइल उपकरणों का उत्पादन 120 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य है, जिसमें से आधे निर्यात किए जाएंगे। हमने उन्हें देश में आपूर्ति श्रृंखला तैयार करने के लिए कहा है और उन्होंने हामी भी भरी है।
चीनी कंपनियों की शिकायत है कि भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के नियमों के कारण चीनी पुर्जा कंपनियां यहां अपने कारखाने नहीं लगा पा रही हैं। इस पर अधिकारी ने कहा, ‘दूसरे देशों में भी पुर्जा कंपनियां हैं और देश में भी आपूर्तिकर्ता हैं। चीनी सेलफोन कंपिनयां उनके साथ कभी भी काम कर सकती हैं और बढ़ सकती हैं।’
मंत्रालय का यह कदम इसलिए खास है क्योंकि भारतीय सेलफोन बाजार में दबदबे के बाद भी चीनी कंपनियों ने यहां से निर्यात नहीं किया है और न ही मूल्यवर्द्धन के लिए आपूर्तिकर्ताओं का तंत्र तैयार किया है। कुछ चीनी कंपनियों के भारत में कारखाने हैं और कुछ ठेके पर फोन तैयार कराती हैं।अनुमान है कि चीनी कंपनियां देश में सालाना 25-26 अरब डॉलर की बिक्री करती हैं और कुल बिक्री में उनका करीब 80 फीसदी हिस्सा है। जो फोन वे यहां बनाती हैं, उनमें महज 12 से 18 फीसदी मूल्यवर्द्धन होता है। पिछले 10 साल में देश से उनका निर्यात भी बहुत कम रहा है, जबकि अमेरिकी कंपनी ऐपल ने वित्त वर्ष 2021 में यहां से 11,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के उपकरण निर्यात किए। यह तस्वीर अगले कुछ साल में बदल सकती है। ओपो ने कहा है कि एमएसएमई की मदद से अपना विनिर्माण तंत्र मजबूत करने के लिए अगले 5 साल में वह 6 करोड़ डॉलर का निवेश करेगी। कंपनी को उम्मीद है कि इससे भारत से उसकी निर्यात क्षमता बढ़कर 5 अरब डॉलर हो जाएगी। इसने और अ​धिक स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं के साथ साझेदारी का भी वादा किया है।
चीनी कंपनियां ​पिछले कई साल से भारतीय बाजार में खुली पहुंच का लाभ उठाती रही हैं और इससे उन्हें तेजी से बाजार हिस्सेदारी हासिल करने में मदद मिली है। टेकआर्क के अनुसार चीनी ब्रांडों की जो हिस्सेदारी वर्ष 2015 में 32 फीसदी थी वह वर्ष 2020 में बढ़कर 99 फीसदी पहुंच गई।

First Published - August 22, 2022 | 9:59 PM IST

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