सर्वोच्च न्यायालय ने ए चौगले ऐंड कंपनी लिमिटेड की अपील को खारिज कर दिया है। कंपनी गोवा में वन भूमि पर निर्यात आधारित लौह अयस्क खनन इकाई लगाना चाहती थी।
बंबई उच्च न्यायालय ने गोवा फाउंडेशन को याचिका स्वीकार की थी जिसमें वन भूमि पर खनन के लिए अधिकारियों की ओर से दी गई मंजूरी को चुनौती दी गई थी। न्यायाधीश तरुण चटर्जी और एच. एस. बेदी की खंडपीठ ने कंपनी के दावे को खारिज कर दिया है।
कंपनी ने लौह अयस्क की आपूर्ति के लिए एक जापानी फर्म के साथ अनुबंध किया था। कंपनी का दावा है कि गोवा सरकार की ओर से उसे लीज पर दी गई 15 हेक्टेयर की भूमि वन भूमि नहीं है और रिकॉर्ड में भी इस भूमि को ‘ड्राई क्रॉप्स लैंड’ बताया गया है। लेकिन न्यायालय का कहना है कि इस भूमि पर प्रति हेक्टेयर पर 3000 पेड़ हैं और इसलिए यह वन भूमि है।
इसके अलावा इस भूमि पर खनन की मंजूरी केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति के बगैर ही दे दी गई थी। कानून के मुताबिक ऐसे खनन कार्यों के लिए केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति आवश्यक है। सर्वोच्च न्यायालय ने हरियाली के संरक्षण के लिए पेड़ लगाने के कंपनी के वादे को भी ठुकरा दिया है।