पिछले चार साल से भारतीय टेलीविजन के बाजार में स्थापित होने की कोशिश कर रही सान्यो-बीपीएल इंडिया संयुक्त उपक्रम इस साल के अंत तक समाप्त हो सकता है।
सूत्रों के मुताबिक कंपनी अपने चार साल के कारोबार की समीक्षा कर रही है और जल्द ही दोनों कंपनियां अलग होने का फैसला कर सकती हैं। जानकारों के अनुसार सान्यो भारत के एलसीडी और प्लाज्मा के साथ ही एयर कंडीशनर और कूलरों के बाजार पर भी ध्यान देना चाहती है। जबकि कलर टेलीविजन का निर्माण करना बीपीएल लिमिटेड का मजबूत पहलू है।
कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘संयुक्त उपक्रम ने टि्वन ब्रांड रणनीति बनाई थी। जिसके तहत प्रीमियम श्रेणी में सान्यो के और सामान्य श्रेणी में बीपीएल के टेलीविजन को बढ़ावा दिया जाएगा। अब सान्यो इस रणनीति के अनुसार नहीं चलना चाहती इसीलिए उसने इस संयुकत उपक्रम से बाहर आने का फैसला किया है।’ इस बारे में बीपीएल और सान्यो के प्रबंधन ने बात करने से मना कर दिया।
अगस्त 2004 में सान्यो और बीपीएल ने बराबर की हिस्सेदारी वाला संयुक्त उपक्रम बनाया था। इसमें सान्यो ने 320 करोड़ रुपये का निवेश किया था। जबकि बीपीएल ने रुपये देने के बजाय कलर टेलीविजन का निर्माण करने वाली दो इकाई और अपना बिक्री और वितरण नेटवर्क भी इस संयुक्त उपक्रम में लगा दिया था।
पिछले चार साल में इस उपक्रम ने सालाना 1.4 करोड़ कलर टेलीविजन की बिक्री वाले भारतीय बाजार के 5 फीसदी पर पकड़ भी बना ली थी। कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि साधारण टीवी के लिए पिक्चर टयूब की कीमत में इजाफा हो रहा है। जबकि एलसीडी और प्लाज्मा टीवी की पिक्चर टयूब के दाम घट रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘अगले चार-पांच सालों में आम टीवी का बाजार खत्म हो जाएगा। तब तक बीपीएल बाजार में मौजूद संभावनाओं को भुनाने की तैयारी कर रही है।’