जहां ऑनलाइन गेमिंग उद्योग गेम्सक्राफ्ट पर 21,000 करोड़ रुपये के कर नोटिस से संबंधित जीएसटी इंटेलीजेंस महानिदेशालय के कारण बताओ नोटिस को लेकर माथापच्ची कर रहा है, वहीं उसे इन खबरों से भी चिंता सताने लगी है कि अधिकारी इसी तरह के नोटिस अन्य कंपनियों को भी भेजने की तैयारी कर रहे हैं। इससे ऑनलाइन गेमिंग उद्योग के लिए एक बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है। तमिलनाडु मंत्रिमंडल ने ऑनलाइन गेमिंग प्रतिबंधित करने के लिए एक अध्यादेश को अपनी मंजूरी दे दी है।
भारत में ऑनलाइन गेमिंग उद्योग 2 अरब डॉलर का है। विश्लेषकों का कहना है कि ऑनलाइन गेमिंग उद्योग को मनोरंजन के तौर पर देखा जाना चाहिए न कि जुए के रूप में, क्योंकि यह कौशल के खेलों के तहत आता है। ऑल इंडिया गेमिंग फेडरेशन के मुख्य कार्याधिकारी रोलैंड लैंडर्स ने कहा, ‘कई नई रिपोर्टों से यह पता चला है कि जीएसटी अधिकारी कौशल से जुड़े उन ऑनलाइन गेमों (सट्टेबाजी और गैर-सट्टेबाजी से जुड़े, दोनों) पर एक समान कर थोप सकते हैं, जो सट्टेबाजी और गैम्बलिंग के साथ संवैधानिक रूप से सुरक्षित व्यवसाय है। यदि ऐसा होता है तो यह 60 साल पुरानी कानूनी न्याय प्रणाली की अवहेलना होगी जिसे सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालयों का समर्थन हासिल है।’
ई-गेमिंग फेडरेशन के मुख्य कार्याधिकारी समीर बार्डे का मानना है कि हमें मत्रियों के समूह (जीओएम) के सुझावों का इंतजार करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘जीओएम का गठन सभी तरह की गेम के लिए उचित और समान जीएसटी व्यवस्था पर सुझाव मुहैया कराने के मकसद से किया गया था और हमें उम्मीद है कि यह समूह कर राजस्व में वृद्धि के साथ साथ इस उद्योग को प्रोत्साहित करने में मददगार साबित होगा।’
जीओएम द्वारा ऑनलाइन गेमिंग, घुड़सवारी और कैसिनो के लिए जीएसटी दर का निर्णय लिया जाना अभी बाकी है, और वह इस पर भी विचार कर रहा है कि क्या कौशल से जुड़े ऑनलाइन खेलों को ‘गेम ऑफ चांस’ से अलग देखा जाना चाहिए। जीओएम ने शुरू में सकल गेमिंग राजस्व पर 28 प्रतिशत कर लगाने का सुझाव दिया था, लेकिन उसने जीएसटी परिषद को अपना निर्णायक सुझाव सौंपने के लिए और समय मांगा। जीएसटी परिषद द्वारा इस मुद्दे पर जीओएम की रिपोर्ट पर अगले महीने बैठक किए जाने की संभावना है।