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टॉरंट समूह में नई पीढ़ी को दी जा रही कंपनी की कमान

Last Updated- December 11, 2022 | 4:43 PM IST

करीब 23,500 करोड़ रुपये के कारोबार वाले टॉरंट ग्रुप के बिजली और दवा कारोबार में मेहता परिवार की तीसरी पीढ़ी को आगे बढ़ाया जा रहा है। टॉरंट पावर ने आज वरुण मेहता को अपने बोर्ड में बतौर निदेशक नियुक्त करने की घोषणा की है। करीब एक सप्ताह पहले समूह की फार्मास्युटिकल इकाई ने अपने बोर्ड में अमन मेहता को बतौर निदेशक नियुक्त करने की घोषणा की थी।
समूह के आंतरिक सूत्रों का कहना है कि नई पीढ़ी धीरे-धीरे कंपनी की कमान संभाल रही है। टॉरंट समूह अपने कारोबार का वि​भिन्न क्षेत्रों विविधीकरण करने की योजना बना रहा है। सुधीर मेहता के पुत्र वरुण मेहता कंपनी की वि​भिन्न कारोबारी इकाइयों में काम कर चुके हैं। इनमें अक्षय ऊर्जा, तापीय ऊर्जा उत्पादन एवं वितरण कारोबार शामिल हैं। वरुण ने ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी ऑफ वारर्विक से स्नातक और फ्रांस के इनसीड से एमबीए की पढ़ाई की है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अक्षय ऊर्जा कारोबार से की थी जहां वह इस क्षेत्र के लिए पूरे समूह की रणनीति तैयार करते थे। शुरू में उन्होंने अक्षय ऊर्जा परियोजनाएं तैयार की और बाद में ताप विद्युत उत्पादन कारोबार की ओर रुख कर गए। यहां उन्होंने विदेश से सीधे तौर पर एलएनजी का आयात करने के लिए रणनीतिक पहल की। टॉरंट पावर ऐसा करने वाली पहली भारतीय बिजली कंपनी थी। वरुण टॉरंट पावर के कार्यकारी निदेशक हैं और लाइसेंस वितरण, पारेषण एवं केबल कारोबार का नेतृत्व करते हैं। टॉरंट समूह ने कहा है कि उनके नेतृत्व में टॉरंट के वितरण कारोबार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिली है। टॉरंट समूह के कुल कारोबार में टॉरंट पावर का योगदान करीब 60 फीसदी है। टॉरंट समूह में उत्तरा​धिकार की योजना कुछ साल पहले शुरू हुई थी। अहमदाबाद के इस समूह का नेतृत्व इसके संस्थापक यूएन मेहता के दो बेटे- सुधीर और समीर मेहता- करते थे।
साल 2014 में सुधीर मेहता ने टॉरंट फार्मा के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया था और उनके भाई समीर मेहता ने उनकी जगह कमान संभाल ली थी। सुधीर के दोनों बेटे- जिनल और वरुण- वर्षों से समूह के बिजली कारोबार से जुड़े रहे हैं। चार साल बाद 2018 में समीर मेहता टॉरंट पावर के चेयरमैन बन गए और जिनल मेहता को टॉरंट पावर का प्रबंध निदेशक बनाया गया। समीर मेहता के पुत्र अमन मेहता को हाल में टॉरंट फार्मा के बोर्ड में शामिल किया गया है। दोनों भाई यानी सुधीर और समीर ने 1980 के देश के आरंभ में अपने पिता के दवा कारोबार में काफी सक्रियता से काम करना शुरू किया था। वास्तव में 1983 में टॉरंट फार्मा को सोवियत रूस से पहला निर्यात ऑर्डर मिला था। एक आंतरिक सूत्र ने कहा कि यह कंपनी के लिए एक महत्त्वपूर्ण पड़ाव था। इससे प्रोत्साहित होकर कंपनी ने 1990 में बिजली क्षेत्र में अपने कारोबार का विस्तार किया।
कभी एमआर के तौर पर काम करने वाले यूएन मेहता ने 1970 में टॉरंट फार्मा की स्थापना की थी। उन्होंने बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ कड़ी प्रतिस्पर्धा से बचने के लिए एक साइकोट्रॉपिक दवा कारोबार को चुना और डॉक्टरों, मनोचिकित्सकों के एक छोटे वर्ग को ल​​क्षित किया था। टॉरंट फार्मा ने उनके बेटों के नेतृत्व में कई बड़े अधिग्रहण किए जिनमें यूनिकेम और एल्डर फार्मा का अ​धिग्रहण शामिल हैं।

First Published - August 10, 2022 | 11:40 AM IST

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