डिश टीवी के पूर्व प्रवर्तकों और येस बैंक के बीच जारी गतिरोध ने भारतीय उद्योग जगत में गैर-सेवानिवृत्त निदेशकों की भूमिका पर सबका ध्यान आकर्षित किया है।
कंपनी अधिनियम 2013 के तहत सार्वजनिक कंपनियों को ऐसे निदेशकों को नियुक्त करने की अनुमति देता है जो सेवानिवृत्ति के दायरे में नहीं होंगे। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह अवधारणा भारतीय जीवन बीमा निगम जैसे बड़े संस्थागत शेयरधारकों को नामित निदेशकों को नियुक्त करने की अनुमति देना है। लेकिन यह उन मामलों को जटिल बना सकता है जहां पूर्व प्रवर्तक समूहों से संबंधित व्यक्ति कंपनी की बागडोर खोने पर भी अपना पद छोड़ने से इनकार करते हैं।
इस महीने के आरंभ में डिश टीवी के शेयरधारकों ने जवाहर गोयल को प्रबंध निदेशक (एमडी) के रूप में दोबारा नियुक्त करने के प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया। हालांकि वह डिश टीवी के बोर्ड में निदेशक बने हुए हैं क्योंकि वह कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन (एओए) के तहत एक गैर-सेवानिवृत्त निदेशक हैं।
येस बैंक उन्हें बोर्ड से बाहर करना चाहता है। बैंक ने सितंबर 2021 में उन्हें निदेशक पद से हटाने का प्रस्ताव दिया था लेकिन उस प्रस्ताव को आगे न बढ़ाने का निर्णय लिया गया था। डिश टीवी का कहना है कि गोयल का निदेशक पद पर बने रहना कानूनी रूप से मान्य है।
डिश टीवी के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘कानून के मौजूदा प्रावधानों के संदर्भ में प्रबंध निदेशक पद से हटने के बावजूद गोयल का निदेशक (गैर-कार्यकारी पद) पद बकरार रहता है।’ कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि गोयल को निदेशक पद से हटाने या उन्हें गैर-सेवानिवृत्त निदेशक पद पर बरकरार न रखने के लिए एओए में संशोधन करने के लिए येस बैंक को एक विशेष प्रस्ताव पारित कराना होगा।
प्रॉक्सी सलाहकार फर्म स्टेकहोल्डर एम्पावरमेंट सर्विसेज के एमडी जेएन गुप्ता ने कहा, ‘गोयल को एओए के तहत एक गैर-सेवानिवृत्त निदेशक नियुक्त किया गया था। इसलिए वह निदेशक बने रहेंगे, भले ही एमडी के रूप में उनकी नियुक्ति पर प्रस्ताव विफल हो क्यों न हो गया हो। नीतिगत तौर पर हम गैर-सेवानिवृत्त निदेशकों की अवधारणा का विरोध करते हैं। कुछ प्रवर्तक निदेशक के रूप में जन्म लेते हैं और निदेशक के तौर पर ही कब्र तक जाते हैं जो उचित नहीं है।’
बीओडी इंडिया के सहायक पार्टनर (एमऐंडए कर एवं नियामकीय सेवा) अनीश शाह ने कहा, ‘शेष निदेशकों के लिए कंपनी अपने एओए में आवश्यक विनियमनों को शामिल कर सकती है ताकि उन्हें आम बैठक में नियुक्त किया जा सके। आमतौर पर सूचीबद्ध कंपनियां अपने एओए के जरिये निदेशक मंडल में उन निदेशकों को निर्धारित करने की ताकत प्रदान करती हैं जिनका कार्यकाल खत्म नहीं होता है।’
डिश टीवी ने उन खबरों का खंडन किया है जिनमें कहा गया है कि गैर-सेवानिवृत्त निदेशक के रूप में गोयल की स्थिति का पर्याप्त रूप से खुलासा नहीं किया गया था। कंपनी ने कहा है कि उसे इस संबंध में किसी भी शिकायत के बारे में कोई जानकारी नहीं है।
येस बैंक ने गिरवी शेयरों के जरिये डिश टीवी में 24.8 फीसदी हिस्सेदारी हासिल कर चुका है। इसलिए वह बाजार नियामक सेबी से संपर्क किए बिना कानून के जरिये गोयल को बाहर करने की ताकत रखता है।