श्रेय के प्रवर्तक हेमंत कनोड़िया ने कहा कि 13,000 करोड़ रुपये के लेनदेन को बीडीओ द्वारा ‘धोखाधड़ी’ के रूप में चिह्नित किया गया था, जो प्रशासक द्वारा नियुक्त ऑडिटर है। इससे पहले किए गए ऑडिट में सब कुछ सही पाया था और हरी झंडी दे दी गई थी।
कनोड़िया की टिप्पणी श्रेय इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनैंस (एसआईएफएल) के हालिया खुलासे के बीच आई है, जिसमें कहा गया है कि प्रशासक को श्रेय इक्विपमेंट फाइनेंस (एसईएफएल) की ऑडिट रिपोर्ट मिली थी। इस रिपोर्ट में 13,110 करोड़ रुपये के लेनदेन थे जो कि दिवाला और दिवालियापन संहिता (आईबीसी) की धारा 66 के तहत धोखाधड़ी थी। इसमें 1,283 करोड़ रुपये के लेन-देन को कम कीमत के रूप में दिखाया गया था।
बिजनेस स्टैंडर्ड को दिए एक बयान में कनोड़िया ने कहा, ‘बीडीओ (जो प्रशासक द्वारा नियुक्त राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त ऑडिट फर्म भी नहीं है) ने 13,000 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन को धोखाधड़ी के रूप में चिह्नित किया है। इन सभी ऋणों का पहले ऑडिट किया गया था और उन्हें हरी झंडी दी गई थी। इसमें वे कर्ज भी शामिल हैं जो पूरे ब्याज के साथ समय पर चुकाए जा रहे हैं।’
कनोड़िया ने कहा कि प्रशासक द्वारा चलाई जा रही मौजूदा प्रक्रिया लेन-देन को धोखाधड़ी के रूप में गलत तरीके से वर्गीकृत करने के लिए ऑडिटरों का उपयोग करके श्रेय को वित्तीय रूप से मारने का एक व्यवस्थित ठोस प्रयास है। जिसके परिणामस्वरूप बोली मूल्यांकन में काफी कमी आएगी।
समय-समय पर एसआईएफएल और एसईएफएल शेयर बाजर को बीडीओ इंडिया की रिपोर्टों के बारे में सूचित कर रहे थे, जिसमें लेनदेन को ‘धोखाधड़ी’ के रुप में चिह्नित किया गया है। लेनदेन पूर्व-कॉरपोरेट ऋणशोधन अक्षमता प्रक्रिया (सीआईआरपी) अवधि से संबंधित थे। कनोड़िया ने कहा कि वैधानिक ऑडिटरों ने कंपनी की संपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनैंस लोन बुक को धोखाधड़ी माना,जो बेतुका है। यह इस तथ्य का प्रमाण है कि ऑडिटर की प्रशासकों से मिलीभगत है।
कनोड़िया ने प्रश्न उठाया कि ‘महत्त्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या यह माना जा सकता है कि कंपनी द्वारा दशकों से स्वीकृत और वितरित किए गए सभी ऋण, विभिन्न स्तर पर ऑडिटरों, नियामक, बैंकर, पेशेवरों द्वारा ऑडिट किए गए थे। क्या वे सभी गलत थे।’
इसके एक उदाहरण के रुप में उन्होंने गाजियाबाद अलीगढ़ एक्सप्रेसवे प्राइवेट लिमिटेड का जिक्र किया, जहां पर एनसीएलटी में धोखाधड़ी का एक मुकदमा दायर किया गया और पूरा भुगतान होने पर वापस से लिया गया। श्रेय कंपनियों के लिए समाधान योजना 25 नवंबर तक प्रस्तुत की जानी है, क्योंकि लेनदारों की समेकित समिति ने समय सीमा बढ़ा दी है।