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‘देर होने से परियोजनाओं की लागत बढ़ेगी’

Last Updated- December 07, 2022 | 8:44 PM IST

विश्व की सबसे बड़ी इस्पात निर्माता कंपनी आर्सेलर मित्तल ने बताया कि भारत में स्थापित होने वाले कंपनी के दो इस्पात संयंत्रों की लागत पहले निर्धारित 860 अरब रुपये से ज्यादा हो सकती है।


दरअसल इस्पात कंपनियों में इस्तेमाल होने वाले लौह अयस्क और कोयले जैसे कच्चे माल की कीमतों में 50 फीसदी से भी ज्यादा हो गई है। लक्ष्मी मित्तल ने कहा , ‘हम ऐसा नहीं कह सकते हैं कि कीमतों में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी होगी।

लेकिन अब इन परियोजनाओं की लागत निर्धारित लागत से ज्यादा ही होगी। क्योंकि इस दौरान इस्पात, तेल, मशीनरी और बाकी कच्चे माल की कीमत में इस दौरान बढ़ोतरी हुई है।’ कंपनी ने साल 2005 में भारत में लगभग 860 अरब रुपये निवेश कर दो इस्पात संयंत्र लगाने की घोषणा की थी। कंपनी यह परियोजनाएं उड़ीसा और झारखंड में लगाने वाली थी। इन परियोजनाओं की कुल उत्पादन क्षमता 2.4 करोड़ टन होगी।

कंपनी ने 2005 में ही इन परियोजनाओं के लिए झारखंड और उड़ीसा की सरकारों के साथ सहमति पत्र पर हस्ताक्षर भी कर लिए थे। मित्तल ने कहा, ‘अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सभी उत्पादों की कीमत में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इस्पात संयंत्रों के लिए जरूरी उत्पादों की कीमत भी 30-50 फीसदी तक बढ़ी हैं।’ हालांकि लागत में यह बढ़ोतरी कितनी फीसदी होगी इस बारे में उन्होंने कुछ भी नहीं बताया।

उन्होंने इस अनुमान से भी इनकार कर दिया कि परियोजना की लागत भी 30-50 फीसदी ही बढ़ेगी। उन्होंने कहा, ‘जब तक हम निर्माण कार्य शुरू नहीं करते तब तक इस बारे में कुद भी कहना सही नहीं होगा। सभी चीजों का आंकलन करने के बाद ही हम इस बारे में कोई आंकड़ा बता पाएंगे।’

मित्तल ने कहा, ‘हम इन संयंत्रों को लगाने की औपचारिकताएं अपनी तरफ से पूरी कर रहे हैं। जिससे हम अनुमति मिलते ही परियोजना पर काम करना शुरू कर दे।’ फरवरी में कंपनी ने बताया था कि वह भारत में दो राज्यों के साथ खनिज पदार्थों की आपूर्ति के लिए खान के आवंटन के लिए बातचीत कर रही है। सरकार पहले ही कंपनी को कोयले की कुछ खदानों का आवंटन कर चुकी है।

First Published - September 11, 2008 | 12:32 AM IST

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