दवाइयों और बेकरी उत्पादों पर तो अक्सर लोग इस्तेमाल की अंतिम तिथि पर ध्यान देते हैं, लेकिन डिब्बाबंद खाद्य उत्पादों पर लिखे पोषक तत्वों के ब्योरे पर नजर कम ही लोगों की पड़ती है।
‘दी नीलसेन कंपनी’ की ओर से 51 देशों में फूड लेबल और आहार पर कराए गए एक इंटरनेट सर्वेक्षण में पाया गया है कि महज 59 फीसदी ही भारतीय उपभोक्ता डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों पर लगे लेबल और पोषक तत्वों के ब्यौरे पर नजर दौड़ाते हैं।
सर्वेक्षण में दूसरी अहम बात यह उभर कर सामने आई है कि आधे से अधिक भारतीय उपभोक्ता वसा सामग्री की जानकारी के लिए फूड पैकेजिंग पर नजर डालते हैं। सर्वेक्षण के मुताबिक 60 फीसदी प्रतिभागी वसा, 58 फीसदी लोग कैलोरी और 52 फीसदी ही अन्य तत्वों की जानकारी के लिए लेबल देखते हैं।
पैकेजिंग पर पोषक तत्वों की जानकारी पर नजर डालने वाले लोगों की प्रतिशतता पिछले दो सालों में 49 फीसदी से बढ़ कर 51 फीसदी हो गई है। पोषक तत्वों के लेबल पर समझ के मामले में 59 फीसदी के साथ भारत एशिया प्रशांत क्षेत्र में शीर्ष पर बना हुआ है। उत्तरी अमेरिकी इस मामले में 67 फीसदी के साथ बढ़त बनाए हुए हैं।
नीलसेन कंपनी की निदेशक (क्लाइंट सॉल्युशंस) चंदना बनर्जी कहती हैं, ‘भारतीयों की व्यस्तता बढ़ती जा रही है। लंबे समय तक काम करना, महिलाओं का कामकाजी होना, बदलाव आदि ने खाना पकाने जैसे घरेलू कार्यों के लिए बहुत ही कम समय छोड़ा है। डिब्बाबंद उत्पाद भारतीय रसोईघरों में तेजी से दस्तक दे रहे हैं।
वैसे लोग ऐसे उत्पादों से कोई खतरा उठाने को तैयार नहीं हैं। दूसरी तरफ इन डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों के निर्माता शक्तिशाली मार्केटिंग हथियार के तौर पर पोषक तत्वों की लेबलिंग का इस्तेमाल कर रहे हैं।’ तकरीबन 37 फीसदी लोगों ने बताया कि वे डिब्बाबंद सामान खरीदते समय पोषक तत्वों की जानकारी जरूर देखते हैं। 35 फीसदी के मुताबिक वे उस वक्त लेबल पर ध्यान देते हैं जब वे इसे पहली बार खरीदते हैं।
सर्वेक्षण में शामिल 10 फीसदी लोगों ने बताया कि वे उस वक्त लेबल पर अधिक ध्यान देते हैं जब वे डाइट पर होते हैं या वजन घटाने की कोशिश कर रहे होते हैं। सर्वेक्षण के मुताबिक 5 फीसदी भारतीय कभी भी इन लेबलों पर ध्यान नहीं देते हैं। वसा और कैलोरी के बाद 48 फीसदी उपभोक्ता लेबल पर प्रोटीन, 46 फीसदी कार्बोहाइड्रेट और 47 फीसदी रंग और 44 फीसदी उपभोक्ता सुगर की जांच करते हैं।
नीलसेन की ओर से अप्रैल 2008 में कराए गए ‘द नीलसेन ग्लोबल ऑनलाइन कंज्यूमर सर्वे’ नामक सर्वेक्षण में 28,253 इंटरनेट उपभोक्ताओं ने भाग लिया था। यूरोप, एशिया प्रशांत, उत्तरी अमेरिका और मध्य पूर्व के 51 देशों में यह सर्वेक्षण कराया गया था।
तकरीबन 37 फीसदी लोग डिब्बाबंद सामान खरीदते समय पोषक तत्वों की जानकारी जरूर देखते हैं
35 फीसदी लोगों के मुताबिक वे पहली बार उत्पाद खरीदते समय लेबल देखते हैं
5 फीसदी भारतीय उपभोक्ता कभी लेबल पर ध्यान नहीं देते