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दवा बाजार को मूल्य वृद्धि से ताकत

Last Updated- December 11, 2022 | 6:26 PM IST

भारतीय दवा बाजार को मुख्य तौर पर मूल्य वृद्धि से ताकत मिल रही है। बाजार अनुसंधान फर्म अवाक्स के आंकड़ों से यह खुलासा हुआ है।
इस साल थोक मूल्य आधारित मुद्रास्फीति के अनुसार अनुसूचित दवाओं (मूल्य नियंत्रण वाली दवाओं) की कीमतों में 10 फीसदी की वृद्धि होनी चाहिए। अगले 12 महीनों के दौरान दवाओं की कीमतों में चरणबद्ध तरीके से वृद्धि जारी रहेगी और अवाक्स का मानना है
कि भारतीय औषधि बाजार कैलेंडर वर्ष 2022 में 2.5 फीसदी की वृद्धि दर्ज करेगा।
अवाक्स का मानना है कि मौसमी दवाओं (संक्रमणरोधी एवं कुछ अन्य श्रेणियों) की दमदार बिक्री और एलएलईएम दवाओं की मूल्य वृद्धि के प्रभाव से बाजार 5 फीसदी तक वृद्धि दर्ज कर सकता है।
मुंबई के औषधि उद्योग के एक  वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि उनकी कंपनी सभी ब्रांडों के तहत मूल्य वृद्धि का आकलन कर रही है। अपनी पहचान जाहिर न करने की शर्त पर उन्होंने कहा, ‘थोक मूल्य आधारित मुद्रास्फीति इस साल 10 फीसदी बढ़ोतरी की अनुमति देती है लेकिन हम सभी ब्रांडों में मूल्य वृद्धि का आकलन कर रहे हैं क्योंकि बाजार में प्रतिस्पर्धा भी मूल्य वृद्धि को नियंत्रित करती है।’ यदि हम मई महीने के आंकड़ों पर गौर करेंगे तो पाएंगे कि मूल्य वृद्धि करीब 5 फीसदी थी जबकि उस दौरान मात्रात्मक बिक्री में 6.6 फीसदी की नकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई। इसके अलावा नई दवाओं की वृद्धि भी 1.7 फीसदी नकारात्मक रही। पिछले 12 महीनों के दौरान यदि हम मूविंग एनुअल टर्नओवर (एमएटी) आंकड़ों पर गौर करने से पता चलता है कि मूल्य वृद्धि 5.4 फीसदी रही जबकि नई दवाओं की वृद्धि 1 फीसदी और मात्रात्मक बिक्री में 0.1 फीसदी नकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई। इसलिए मात्रात्मक बिक्री में गिरावट दर्ज की गई लेकिन मूल्य वृद्धि से सकल आईपीएम वृद्धि को ताकत मिली।
अवाक्स की अध्यक्ष शीतल सापले ने कहा कि मई महीने के दौरान बाजार में 3.3 फीसदी की नकारात्मक मूल्य वृद्धि दर्ज की गई जबकि इकाई बिक्री की वृद्धि दर 10.4 फीसदी नकारात्मक रही। इसका मतलब साफ है कि मूल्य वृद्धि के ऐसे कुछ कारक अवश्य होंगे जिससे बाजार को ताकत मिली।

First Published - June 8, 2022 | 1:04 AM IST

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