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बाजार पर दिखेगा सीमेंट में बदलाव का असर

Last Updated- December 11, 2022 | 5:48 PM IST

निवेशक सीमेंट क्षेत्र के भविष्य को लेकर विभाजित हैं। सस्ते इन्फ्रास्ट्रक्चर भवन निर्माण कार्यक्रम से कुछ बिक्री वृद्धि सुनि​श्चित हुई है, लेकिन निजी क्षेत्र में मांग कमजोर है। अंबुजा-एसीसी अ​धिग्रहण में अदाणी समूह के प्रवेश का मतलब है ज्यादा प्रतिस्पर्धी दबाव पैदा होना।
कई कंपनियों द्वारा नियोजित क्षमता वृद्धि को देखते हुए आने वाले समय में कीमत प्रतिस्पर्धा और कम इस्तेमाल जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। कच्चे माल और तेल कीमतें बढ़ रही हैं और इनमें तेजी की चरम ​स्थिति समाप्त हो सकती है।  इससे संकेत मिलता है मार्जिन दबाव में कमी आएगी।
वर्ष 2024-25 तक करीब 9 करोड़ टन की क्षमता वृद्धि होगी। यह 5.5 प्रतिशत की तीन साल की चक्रवृद्धि दर (सीएजीआर) है। संतोषजनक उपयोग स्तरों के लिए इस अव​धि के लिए जरूरी सीएजीआर 7 प्रतिशत पर लाए जाने की जरूरत होगी। यदि यह लक्ष्य हासिल होता है तो इससे मूल्य निर्धारण पर दबाव नहीं पड़ेगा। समेकन की संभावना है, क्योंकि प्रमुख चार कंपनियां करीब 60 प्रतिशत बढ़ी हुई क्षमता जोड़ेंगी और इन चारों की 51 प्रतिशत की भागीदारी के साथ बाजार भागीदारी केंद्रित होगी।
इस्तेमाल दर वित्त वर्ष 2022 (52.5-55 करोड़ टन) में प्रभावी क्षमता के 69 प्रतिशत के आसपास रहने की संभावना है और 2024-25 तक यह 62.5-65 करोड़ टन हो जाएगी। द​क्षिण क्षेत्र का क्षमता इस्तेमाल 55 प्रतिशत के साथ कम है।
अल्पाव​धि में मार्जिन दबाव कम से कम एक और तिमाही तक बना रह सकता है। यह मॉनसून की अव​धि के दौरान मांग में दर्ज की जाने वाली कमजोरी की वजह से है।  ईंधन कीमतों में ​स्थिरता के संकेतों के बावजूद, कोयला, गैस और कच्चे तेल और अन्य कच्चे माल की लागत ऊंची बनी हुई है। वित्त वर्ष की पहली छमाही में प्रति टन एबिटा ​वित्त वर्ष 2022 की चौथी तिमाही के मुकाबले वि​भिन्न कंपनियों के लिए 150-200 रुपये तक घट सकता है।
वित्त वर्ष 2023 में समेकित एबिटा घट सकता है और कीमतें नीचे आ सकती है यदि अदाणी समूह को खासकर चुनौतीपूर्ण बाजार भागीदारी से जूझना पड़ता है, क्योंकि इससे कुछ नई क्षमता वृद्धि को बढ़ावा मिल सकेगा। उद्योग की पूंजीगत खर्च योजनाओं और कम निजी मांग के परिवेश को देखते हुए, मुक्त नकदी प्रवाह कमजोर रहेगा। कुछ सतर्क विश्लेषकों ने वित्त वर्ष 2023 के लिए पूरे क्षेत्र के कीमत लक्ष्य और मूल्यांकन में कटौती की है।
एक मुख्य सवाल यह है कि बाजार में नकारात्मक बदलावों का असर पहले ही दिख चुका है और वह इस क्षेत्र को लेकर क्या अब ज्यादा आशावादी बन गया है?
एसीसी और अंबुजा (जिनकी शेयर कीमतें विलय एवं अ​धिग्रहण संबं​धित गतिरोध की वजह से प्रभावित हुईं) को छोड़कर, सभी अन्य प्रमुख सूचीबद्ध सीमेंट कंपनियों में शेयर कीमतों में कमजोरी आई है।
मूल्यांकन मापक के तौर पर उद्यम वैल्यू/एबिटा का इस्तेमाल करें तो संकेत मिलता है तो पूरे क्षेत्र का मल्टीपल तीन साल के औसत से भी नीचे आ गया है। इस क्षेत्र ने पिछले 6 महीने में मुख्य बाजार के मुकाबले कमजोर प्रदर्शन किया है।
अल्ट्राटेक, श्री सीमेंट, रैमको, बिड़ला कॉरपोरेशन और डालमिया भारत जैसे कई सीमेंट कंपनियों के शेयरों में पिछले 6 महीनों के दौरान 20 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई है।

First Published - July 4, 2022 | 11:56 PM IST

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