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वैक​​ल्पिक ईंधन की कार पर दें जोर

Last Updated- December 11, 2022 | 4:20 PM IST

मारुति सुजूकी के चेयरमैन आर सी भार्गव ने छोटी किफायती कारों के लिए हाइब्रिड, सीएनजी, एथनॉल और बायोगैस जैसी वैकल्पिक तकनीक की वकालत करते हुए कहा है कि सरकार को इन्हें बढ़ावा देना चाहिए ताकि छोटे-मझोले शहरों के ग्राहकों को भी इलेक्ट्रिक कार का विकल्प मिल सके। फिलहाल नई तकनीक वाली कारें आम लोगों के बजट से बाहर हैं।
भार्गव ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से बातचीत में कहा कि छोटी कारों (7.5 लाख रुपये से कम दाम वाली) की बिक्री में लंबे समय तक वृद्धि बनी रहेगी क्योंकि दोपहिया चलाने वाले 20 करोड़ से अ​धिक लैग आगे जाकर कार खरीदेंगे। लेकिन कारों की कुल बिक्री में छोटी कारों की हिस्सेदारी घट रही है, जो साफ नजर भी आ रही है। इसकी बड़ी वजह बीएस-4 से बीएस-6 उत्सर्जन मानक अपनाया जाना है क्योंकि इससे कारों के दाम बढ़ गए हैं और उन्हें खरीदने जा रहे लाखों लोगों ने अपनी योजना टाल दी है। उन्होंने कहा, ‘देश में बाजार एक जैसा नहीं है। सही मायने में यहां दो तरह के बाजार या खरीदार हैं – एक बाजार ‘भारत’ है, जिसमें किफायती छोटी कारों की मांग है और दूसरा विकसित बाजार है, जहां खरीदार वै​श्विक ग्राहकों की तरह बड़ी और 20 से 25 लाख रुपये की महंगी कारें लेना चाहते हैं।’भार्गव ने कहा कि अन्य देशों से अलग भारत में अब भी 70 से 75 फीसदी बाजार 4 मीटर से छोटी कारों का है और इस श्रेणी में बिकने वाली ज्यादातर कार 6-7 लाख रुपये से कम हैं। उन्होंने कहा, ‘लेकिन इस बाजार में ई-कार की रफ्तार काफी धीमी है क्योंकि देश में प्रति व्य​क्ति आय महज 2,000 डॉलर (करीब 1.50 लाख रुपये) है, जबकि यूरोपीय बाजार में प्रति व्य​क्ति सालाना आय 40,000 डॉलर है।’ भार्गव ने कहा कि मारुति भी महंगी कार खरीदने वालों के लिए ई-वाहन तैयार कर रही है।

उन्होंने कहा कि असल चुनौती इस बात की है कि ‘भारत’ के बाजार की समस्या कैसे दूर की जाए क्योंकि फिलहाल ई-कार की कीमत पेट्रोल-इंजन कारों की तुलना में करीब दोगुनी है। 12-13 लाख रुपये की ई-कार इस जमात के लाखों खरीदारों के लिए किफायती नहीं होगी।
 

इलेक्ट्रिक के बजाय दूसरी तकनीकों को इसका समाधान बताते हुए भार्गव ने कहा, ‘टोयोटा द्वारा विकसित हाइब्रिड कार में इस्तेमाल तकनीक में इलेक्ट्रिक कारों से भी कम कार्बन उत्सर्जन होता है। एथनॉल का उपयोग हो और बायोगैस की संभावना को अमली जामा पहनाया जाए तो कार्बन उत्सर्जन घटाने के साथ ही कच्चे तेल का आयात भी कम किया जा सकेगा।’ इसलिए सरकार को इलेक्ट्रिक वाहन ही नहीं बल्कि दूसरी तकनीकों को भी प्रोत्साहित करना चाहिए। 
 

भार्गव के मुताबिक हाइब्रिड कार पेट्रोल-डीजल कार से बमुश्किल 4 लाख रुपये महंगी हैं। अगर सरकार ई-कारों की तरह इन पर भी वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) घटाए तो छोटी कारों की लागत कम हो जाएगी और इनके दाम छोटी ई-कारों (सब्सिडी के बावजूद) की तुलना में काफी कम हो जाएंगे। 

First Published - August 24, 2022 | 9:49 PM IST

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