नारायण हेल्थ ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में व्यापक विस्तार की योजनाएं तैयार की हैं। हालांकि चिकित्सा पर्यटन को वैश्विक महामारी के पूर्व स्तर तक लौटना अभी बाकी है लेकिन कुल मिलाकर घरेलू बाजार में मरीजों की आवक बढ़ रही है। नारायण हेल्थ के कार्यकारी वाइस चेयरमैन वीरेन शेट्टी ने सोहिनी दास से बातचीत में कोविड वैश्विक महामारी से मिली सबक और आगे की रणनीति के बारे में विस्तार से चर्चा की। नारायण हेल्थ के चेयरमैन एवं जानेमाने डॉक्टर देवी शेट्टी के बेटे ने बताया कि अस्पताल उद्योग को हमेशा डॉलर में खर्च करना पड़ता है और इसलिए मार्जिन पर दबाव दिखा। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश:
विदेश में कारोबार के विस्तार के लिए आपकी क्या योजनाएं हैं?
केमैन आइलैंड्स में हमारा निवेश एक ऐसा विस्तार जिसे वास्तव में वहां के हमारे मुख्य परिसर से जोड़ा जा रहा है। वह शहर के समीप और वह एक कैंसर अस्पताल है। उसकी घोषणा काफी पहले की गई थी लेकिन वैश्विक महामारी के दौरान उसमें काफी देरी हुई। उस दौरान वस्तुओं की आवाजाही काफी कठिन हो गई थी क्योंकि केमैन एक द्वीप है। इसलिए वहां सब कुछ हवाई मार्ग से अथवा जहाज के जरिये भेजने की जरूरत होती है। हमें कैंसर पर केंद्रित एक सर्जरी केंद्र तैयार करने पर करीब 10 करोड़ डॉलर खर्च होने का अनुमान है। इसके अलावा, हम अपनी सेवाओं को कैरिबियन में लोगों के करीब ले जाने के लिए क्लीनिक, जांच केंद्र आदि पर भी निवेश कर रहे हैं। हम कैरेबियन के विभिन्न हिस्सों में भी अवसरों की तलाश कर रहे हैं। भारत के बाहर हम कैरेबियन पर सबसे अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
केमैन आइलैंड्स की आबादी बहुत कम है। ऐसे में व्यापक भौगोलिक क्षेत्र तक सेवाएं पहुंचाने के लिए आपकी क्या योजनाएं हैं?
भले ही वहां की आबादी कम है लेकिन उन सभी को कुछ न कुछ चाहिए जो अब तक उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया है। उनमें से अधिकतर लोगों को स्वास्थ्य देखभाल के लिए हवाई मार्ग से अमेरिका या अन्य देशों की ओर रुख करना पड़ता है। इसलिए आबादी कम जरूर है लेकिन हम उन्हें काफी नियंत्रित सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। हमारे लिए यह केवल सर्जरी ही नहीं है बल्कि हम प्राथमिक चिकित्सा, माध्यमिक देखभाल, डेकेयर आदि के साथ-साथ रोबोटिक सर्जरी और ऑन्कोलॉजी आदि में भी उतरना चाहते हैं।
क्या उत्तरी अमेरिका विस्तार की कोई योजना है?
हां, हम योजना बना रहे हैं। हम भविष्य में कई साल आगे की सोच रहे हैं क्योंकि जैसा मैंने कहा कि जिन सभी कैरिबियाई द्वीपों को साथ रखा गया है वे काफी छोटे हैं। उनकी आबादी एक भारतीय शहर के बराबर भी नहीं है। हालांकि यह समय बताएगा कि हम वहां विस्तार के अवसरों की तलाश के लिए कब पहल करेंगे लेकिन इत ना तो तय है कि हम स्वास्थ्य सेवा के लिए दुनिया के सबसे बड़े बाजार के करीब हैं। हम भविष्य में कभी भी वहां विस्तार करने पर विचार कर सकते हैं। अभी हम लोगों से बात कर रहे हैं, यह देखने की कोशिश कर रहे हैं कि हम क्या भूमिका निभा सकते हैं।
भारत के लिए भी आपने 1,000 करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनाई है। इस क्या कहेंगे?
भारत में हम बेंगलूरु और कोलकाता पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं जो सबसे पुराने शहरों में शामिल हैं। वहां हमारे सबसे पुराने अस्पताल हैं और वहां हम रोजाना आने वाले सभी रोगियों को एडमिट करने के लिए संषर्घ कर रहे हैं। यहां तक कि आज भी हमारा ओटी पूरी क्षमता पर चल रहा है। आईसीयू भी फुल है और इसलिए हमें कई रोगियों की सर्जरी को टालना पड़ रहा है। इसलिए इन दोनों शहरों में हमें काफी क्षमता विस्तार की दरकार है। यह हमारी पहली प्राथमिकता है। इसके अलावा हम
अहमदाबाद, जयपुर, दिल्ली, रायपुर आदि शहरों में मौजूद अपने अस्पतालों में क्षमता विस्तार पर निवेश करेंगे।
अगले दो-तीन साल के दौरान आप अपने अस्पतालों में कितने अतिरिक्त बिस्तरों को जोड़ने की योजना बना रहे हैं?
कम से कम बेंगलूरु और कोलकाता के दो अस्पतालों में हम 600 ये 800 बिस्तरों को जोड़ने की योजना बना रहे हैं। लेकिन ये सभी बिस्तर ऐसे नहीं होंगे जिस पर आप पूरी रात सो सकें। बेंगलूरु में हम वाह्य रोगियों के लिए काफी क्षमता बढ़ा रहे हैं क्योंकि वहां डॉक्टरों के बैठले लायक जगह भी नहीं है। वहां दवाखाना के लिए भी जगह नहीं है। हमें काफी बड़े लैब की जरूरत है और हमें बड़ी तादाद में ओटी की दरकार है। इसलिए हम केवल बिस्तरों को नहीं गिन रहे हैं।