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भारत को बड़े मिसाइल निर्यात की उम्मीद

Last Updated- December 11, 2022 | 1:35 PM IST

परमाणु सक्षम सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का निर्माण करने वाले भारत-रूस संयुक्त उद्यम को वर्ष 2025 तक 5 अरब डॉलर के ऑर्डर मिलने की उम्मीद है। इसके चेयरमैन ने फिलीपींस के साथ इस साल 37.5 करोड़ डॉलर के पहले निर्यात सौदे पर हस्ताक्षर करते हुए आज यह संभावना जताई।
 चेयरमैन अतुल डी राणे ने मंगलवार को रॉयटर्स की साझेदार एएनआई को बताया कि ब्रह्मोस एयरोस्पेस नए ऑर्डरों के लिए इंडोनेशिया, मलेशिया और वियतनाम के साथ बातचीत कर रहा है। 50.5 प्रतिशत भारतीय और 49.5 प्रतिशत रूसी साझेदारी वाला यह संयुक्त उद्यम प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के प्रमुख मेक-इन-इंडिया कार्यक्रम मे सटीक बैठता है। भारत ने लाइसेंस के अंतर्गत रूसी मिग लड़ाकू विमान और स्यू-30 जेट बनाए हैं तथा इन दोनों ने भारत में ब्रह्मोस मिसाइल बनाने के लिए सहयोग किया है। रूस पारंपरिक रूप से भारत का प्रमुख हथियार आपूर्तिकर्ता भी रहा है।

 पिछले साल अप्रैल में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा था कि दोनों देश भारत में रूसी सैन्य उपकरणों के अतिरिक्त उत्पादन पर चर्चा कर रहे हैं।भारत, जिसने यूक्रेन पर रूस के हमले की स्पष्ट रूप से निंदा नहीं की है, चीन के बाद रूस के दूसरे सबसे बड़े तेल ग्राहक के रूप में भी उभरा है। राणे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2025 तक 5 अरब डॉलर (रक्षा निर्यात में) के स्तर तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है। मुझे उम्मीद है कि ब्रह्मोस स्वयं ही वर्ष 2025 तक 5 अरब डॉलर का लक्ष्य हासिल कर लेगा। 

बोइंग इंडिया का मिश्र धातु निगम संग करार 
विमान विनिर्माता बोइंग इंडिया ने मंगलवार को कहा कि वह देश में विमान निर्माण के हिस्सों एवं कलपुर्जो में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल के विकास के लिए सरकारी उपक्रम मिश्र धातु निगम लिमिटेड (मिधानी) के साथ परस्पर सहयोग करेगी। मिधानी सार्वजनिक क्षेत्र का एक रक्षा उपक्रम है।

First Published - October 18, 2022 | 9:33 PM IST

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