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गांवों में सुस्त मांग से एफएमसीजी की बिक्री घटी

Last Updated- December 11, 2022 | 2:11 PM IST

 सितंबर महीने में ग्रामीण बाजारों में बिक्री कमजोर रहने से रोजमर्रा के सामान बनाने वाली कंपनियों (एफएमसीजी) की बिक्री अगस्त की तुलना में कम रही है। रिटेल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म बिजोम के आंकड़ों से यह पता चला है। हालांकि शहरी बाजारों में एमएफसीजी की बिक्री में सितंबर में भी तेजी बनी रही।
बिजोम की रिपोर्ट के अनुसार कुछ इलाकों में अत्य​धिक बारिश और कुछ जगहों पर कम बारिश से कृ​षि पैदावार तथा ग्रामीणों की आय प्रभावित होने से ग्रामीण बाजारों में बिक्री पर असर पड़ा है।
रिपोर्ट में कहा गया, ‘मुद्रास्फीति की चिंता अभी पूरी तरह दूर नहीं हुई है, ऐसे में शहरी और ग्रामीण दोनों बाजारों में किराना स्टोर माल के भंडारण में सतर्कता बरत रहे हैं। कई किराना स्टोर पिछले महीने का माल बिकने के बाद ही नया स्टॉक भरने पर जोर दे रहे हैं।’ 
अगस्त की तुलना में सितंबर महीने में ग्रामीण बाजारों में एफएमसीजी की बिक्री 14.3 फीसदी घट गई, जबकि शहरी इलाकों में बिक्री 1.1 फीसदी बढ़ी है। सितंबर में देश भर में एफएमसीजी की बिक्री अगस्त की तुलना में 9.6 फीसदी कम रही। बिजोम के अनुसार एफएमसीजी की कुल बिक्री में ग्रामीण इलाकों की हिस्सेदारी 65 से 70 फीसदी होती है। पिछले महीने के मुकाबले जिंसों की बिक्री 14.5 फीसदी घटी, जबकि होम केयर उत्पादों की बिक्री में 8.6 फीसदी की कमी आई।
हालांकि त्योहारी मौसम को देखते हुए मांग में मजबूती आने की उम्मीद है क्योंकि महामारी के दो साल के बाद लोग खुलकर उत्सव मना रहे हैं। बिजोम में ग्रोथ एवं इनसाइट के प्रमुख अक्षय डिसूजा ने कहा कि मौजूदा रुझान और महंगाई घटाने के उपायों से खपत की अड़चनें दूर होंगी और त्योहारों के दौरान ग्राहकों की मांग बढ़ेगी।
बिजोम के आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल सितंबर के मुकाबले उपभोक्ता वस्तुओं की बिक्री इस सितंबर में 8.1 फीसदी बढ़ी और अप्रैल-जून तिमाही की तुलना में जुलाई-सितंबर तिमाही में इसमें 21.3 फीसदी का इजाफा हुआ।
अगस्त में ग्रामीण और शहरी दोनों बाजारों में बिक्री में अच्छी वृद्धि देखी गई थी और जुलाई के मुकाबले ग्रामीण इलाकों में बिक्री में 6.7 फीसदी और शहरी  बाजार में 5.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी। इस दौरान एफएमसीजी की कुल बिक्री में 6.3 फीसदी की वृद्धि हुई थी।
पारले प्रोडक्ट्स के सीनियर कैटेगरी प्रमुख बीके राव ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘आम तौर पर त्योहारी मौसम से पहले ग्राहक बड़े उत्पादों की खरीदारी करते हैं। इसके साथ ही महंगे खाने-पीने के उत्पादों वाले उपहार पैकेटों की भी मांग में तेजी आती है। जून से अगस्त के दौरान हर साल एफएमसीजी की बिक्री थोड़ी नरम रहती है।’ 
मैरिको ने अपने तिमाही अपडेट में कहा था, ‘भारत में मांग का रुझान पिछली तिमाही के अनुरूप रहा है और पिछले महीने इसमें कुछ सुधार के संकेत दिखे हैं।’ 
हालां​कि कंपनी ने कहा कि खुदरा मुद्रास्फीति ऊंची बनी रहने से तिमाही में ग्रामीण इलाकों में मांग नरम बनी रहेगी। हालांकि शहरी और प्रीमियम गैर-जरूरी सेगमेंट वाले उत्पादों की बिक्री बेहतर बनी हुई है।
 

First Published - October 4, 2022 | 10:14 PM IST

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