फोर्टिस हेल्थकेयर ने अस्पतालों की अपनी शृंखला के कारोबार में पहली बार मुनाफा दर्ज किया है। 30 जून 2008 को समाप्त हुई तिमाही में फोर्टिस ने 94 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया।
पूर्ववर्ती वर्ष की समान अवधि में इसे 23.5 करोड़ रुपये का कुल घाटा हुआ था। फोर्टिस के नतीजों को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि यह परिणाम न सिर्फ इसके अस्पतालों के प्रदर्शन को स्पष्ट करता है बल्कि भारतीय स्वास्थ्य सेगमेंट में बढ़ रही राजस्व उत्पादन संभावनाओं का भी संकेत है।
कॉरपोरेट संचालित अस्पताल मुनाफा दर्ज कर रहे हैं। लेकिन उन्हें पास के डॉक्टरों, नर्सिंग होम आदि से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ रही है। नेशनल कमीशन ऑन मैक्रोइकोनोमिक्स ऐंड हेल्थ के मुताबिक देश में मानव संसाधन और अत्याधुनिक चिकित्सा प्रौद्योगिकी का 75 फीसदी, 15,097 अस्पतालों में से 68 फीसदी और कुल 23,819 बिस्तरों में से 37 फीसदी भागीदारी निजी क्षेत्र की है।
इस उद्योग से जुड़े जानकारों के मुताबिक अपोलो, वोकहार्ड, मणिपाल, मैक्स, फोर्टिस समेत स्वास्थ्य क्षेत्र की कई कंपनियां मुनाफा दर्ज कर रही हैं। इसका एक प्रमुख कारण यह भी है कि ये कंपनियां निवेश के दौर से गुजर रही हैं। एक विशेषज्ञ के मुताबिक, ‘फोर्टिस समेत सभी अस्पताल समूहों ने मुनाफा कमाने के लिए गैर-मैट्रो शहरों में दस्तक दी है।
फोर्टिस का जयपुर अस्पताल महज 10 महीने के परिचालन में अच्छा मुनाफा कमा रहा है।’ ये अस्पताल प्रबंधन खर्च में कमी लाकर भी मुनाफा दर्ज कर रहे हैं। हालांकि इन अस्पतालों ने संपत्ति की ऊंची दर पर खरीद और दक्षता बढ़ाने के लिए डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों व पेशेवरों पर फीस के तौर पर भारी-भरकम रकम खर्च की है।
फोर्टिस के प्रबंध निदेशक शिविंदर एम. सिंह के मुताबिक मरीजों के ठहरने के दिनों में कमी से अस्पताल में मौजूदा सुविधाओं का सही उपयोग होता है। सिंह ने बताया, ‘हम खर्च में कमी लाने और अस्पतालों की दक्षता में सुधार लाने पर लगातार ध्यान दे रहे हैं।’