भारतीय तेल कंपनियों को कृष्णा-गोदावरी (केजी) बेसिन से गैस की आपूर्ति शुरू होने का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं।
देश में अपने पेट्रोलियम उत्पाद बेचने वाली इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसीएल) और हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (एचपीसीएल) जैसी तेल कंपनियां इस साल के अंत में केजी बेसिन से गैस की शुरुआत के बाद बड़े पैमाने पर नाफ्था और तेल के निर्यात की योजना बना रही हैं।
आईओसी के निदेशक (योजना) बी. एम. बंसल ने कहा, ‘केजी बेसिन से गैस की आपूर्ति शुरू होने से उद्योगों को हमारे तेल की बिक्री पर असर पड़ेगा। इससे औद्योगिक तेल का बड़े पैमाने पर निर्यात होगा।’ आईओसी अपना आधे से अधिक तेल देश में ही खपाती है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल), गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (जीएसपीसी) और तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) ने केजी बेसिन में बड़े गैस भंडारों की तलाश की है। ये गैस भंडार देश में गैस की किल्लत को दूर करने की क्षमता से लैस हैं।
संभावना जताई जा रही है कि रिलायंस इस साल के अंत तक गैस का उत्पादन शुरू कर देगी और शुरू में उर्वरक एवं विद्युत संयंत्रों को इसकी आपूर्ति करेगी। ये उर्वरक एवं विद्युत संयंत्र गैस के अभाव में नाफ्था और ईंधन तेल का इस्तेमाल करते हैं।
इस साल जुलाई में नाफ्था का निर्यात घट कर 6.8 लाख टन रह गया है जो एक साल पहले की इसी अवधि में तकरीबन 10 लाख टन था। जुलाई में तेल निर्यात मामूली बढ़त के साथ 5.6 लाख टन रहा जो एक साल पहले इसी महीने के दौरान 4.2 लाख टन था। बंसल ने कहा, ‘यहां से निर्यात के लिए अच्छी संभावनाएं हैं।’
नाफ्था और तेल का निर्यात बढ़ने से सरकारी तेल कंपनियों के मार्जिन पर इसका ज्यादा असर नहीं पड़ेगा क्योंकि ये कंपनियां भारत में इन उत्पादों को बाजार कीमत पर बेचती हैं। इंडियन ऑयल डीजल एवं पेट्रोल का उत्पादन बढ़ाने के लिए अपनी रिफाइनरियों के आधुनिकीकरण पर 4,000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। बंसल ने कहा, ‘हम पेट्रोकेमिकल संयंत्रों की स्थापना कर रहे हैं जिनमें स्टॉक के रूप में हमारी रिफाइनरियों से आने वाले नाफ्था का इस्तेमाल किया जाएगा।’