facebookmetapixel
रेट कट का असर! बैंकिंग, ऑटो और रियल एस्टेट शेयरों में ताबड़तोड़ खरीदारीTest Post कैश हुआ आउट ऑफ फैशन! अक्टूबर में UPI से हुआ अब तक का सबसे बड़ा लेनदेनChhattisgarh Liquor Scam: पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य को ED ने किया गिरफ्तारFD में निवेश का प्लान? इन 12 बैंकों में मिल रहा 8.5% तक ब्याज; जानिए जुलाई 2025 के नए TDS नियमबाबा रामदेव की कंपनी ने बाजार में मचाई हलचल, 7 दिन में 17% चढ़ा शेयर; मिल रहे हैं 2 फ्री शेयरIndian Hotels share: Q1 में 19% बढ़ा मुनाफा, शेयर 2% चढ़ा; निवेश को लेकर ब्रोकरेज की क्या है राय?Reliance ने होम अप्लायंसेस कंपनी Kelvinator को खरीदा, सौदे की रकम का खुलासा नहींITR Filing 2025: ऑनलाइन ITR-2 फॉर्म जारी, प्री-फिल्ड डेटा के साथ उपलब्ध; जानें कौन कर सकता है फाइलWipro Share Price: Q1 रिजल्ट से बाजार खुश, लेकिन ब्रोकरेज सतर्क; क्या Wipro में निवेश सही रहेगा?Air India Plane Crash: कैप्टन ने ही बंद की फ्यूल सप्लाई? वॉयस रिकॉर्डिंग से हुआ खुलासा

गोल्ड ईटीएफ निवेश में आई कमी

Last Updated- December 11, 2022 | 1:20 PM IST

 सितंबर 2022 को समाप्त होने वाले पिछले एक साल में गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) में शुद्ध निवेश आधे से भी कम हो गया है। यह एक ऐसी अवधि है, जब सोने ने 9.5 प्रतिशत से अधिक रिटर्न के साथ ज्यादातर अन्य परिसंपत्ति वर्गों से बेहतर प्रदर्शन किया है।
एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) के आंकड़ों से पता चलता है कि निवेशकों ने अक्टूबर 2021 और सितंबर 2022 के बीच गोल्ड ईटीएफ में 2,094 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में 4,188 करोड़ रुपये का निवेश किया गया था।
एक साल से सोने के दाम सुस्त रहने के बाद इसी अव​धि के दौरान इसने सुधार का प्रदर्शन किया। 12 महीनों के दौरान फरवरी 2022 में पहली बार ऐसा हुआ कि जब सोने ने 50,000 रुपये के स्तर पर जोरदार ढंग से वापसी की। इस सुधार के परिणामस्वरूप गोल्ड ईटीएफ में मजबूत प्रदर्शन नजर आया।
इक्रा के विश्लेषक एमएफआई 360 के आंकड़ों के अनुसार 30 सितंबर, 2022 को समाप्त एक वर्ष की अवधि में पांच गोल्ड ईटीएफ ने नौ प्रतिशत से अधिक रिटर्न दिया है। अन्य अधिकांश गोल्ड ईटीएफ का प्रदर्शन नौ से 8.5 प्रतिशत के दायरे में रहा। इस अवधि के दौरान सेंसेक्स में तीन प्रतिशत से अ​धिक की गिरावट आई।
वर्ष 2022 की शुरुआत में (विशेष रूप से फरवरी में जब दामों में छह प्रतिशत इजाफा हुआ) सोने की कीमतों में उछाल मुख्य रूप से रूस और यूक्रेन के बीच बढ़ते तनाव के दौरान तेज होती अनिश्चितताओं का नतीजा थी।
हालांकि, अक्टूबर में सोने के दामों में कमी आई, जिससे अधिकांश गोल्ड ईटीएफ का एक साल का रिटर्न 20 अक्टूबर को छह प्रतिशत से नीचे आ गया है। विश्लेषकों के अनुसार मध्य से लेकर दीर्घाव​धि तक सोने में और तेजी देखने को मिल सकती है।
मोतीलाल ओसवाल फाइनैं​शियल सर्विसेज के विश्लेषकों ने कहा कि इस साल विस्तृत अर्थव्यवस्था का परिदृश्य जरूर हावी रहा है, लेकिन ध्यान मुख्य रूप से केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति, मुद्रास्फीति के दबाव और भू-राजनीतिक तनाव पर है।
अगर इन कारकों में कोई बदलाव होता है, तो हम कुछ शॉर्ट कवरिंग देख सकते हैं, जिससे सोने के दाम काफी अधिक और तेजी से बढ़ सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर निवेशक सोने के दाम 46,800 रुपये से 47,500 रुपये के दायरे में होने पर सोना एकत्रित करें, तो निवेशक मध्य अवधि में आठ प्रतिशत और दीर्घाव​धि में 17 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद कर सकते हैं।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जब तक प्रमुख केंद्रीय बैंक अपना रुख नहीं बदलते, तब तक दामें पर दबाव जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि हमें लगता है कि जब तक हम आक्रामक ब्याज दरों में बढ़ोतरी के संबंध में प्रमुख केंद्रीय बैंकरों के रुख में बदलाव नहीं देखते यानी देखते हैं, तब तक हमें सोने के दामों पर दबाव दिखता रह सकता है।

First Published - October 23, 2022 | 10:51 PM IST

संबंधित पोस्ट