भारत सरकार के सचिवों की एक अधिकारप्राप्त समिति ने ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (ओवीएल) को एक महत्वाकांक्षी योजना पर आगे बढ़ने के लिए हरी झंडी दिखा दी है।
ओवीएल, सार्वजनिक क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनी ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (ओएनजीसी) की ही सहायक कंपनी है। प्रस्तावित योजना के तहत ओवीएल को इंपीरियल एनर्जी कॉर्पोरेशन के लिए लगभग 120 अरब रुपये (3 अरब डॉलर) की बोली लगाने की मंजूरी दी गई है।
इंपीरियल एनर्जी कॉर्पोरेशन, तेल अन्वेषण और उत्पादन की प्रमुख कंपनी है, जो कि लंदन स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध भी है। निवेश बैंकिंग के सूत्रों के मुताबिक ओवीएल, इंपीरियल एनर्जी के लिए पहले ही शुरुआती तौर पर 2.96 अरब डॉलर की बोली लगा चुकी है।
ऐसा माना जा रहा है कि इंपीरियल एनर्जी के पास 920 मिलियन बैरल के तेल और गैस के भंडार हैं जिसमें से 864 मिलियन बैरल भंडार तेल के और बाकी बचे 58 मिलियन बैरल भंडार गैस के हैं। इंपीरियल एनर्जी के यह भंडार रूस और कजाखस्तान में हैं।
बैंकिंग सूत्रों के मुताबिक, इस होड़ में भारतीय कंपनी को चीन की बड़ी तेल कंपनी सिनोपेक से कड़ी टक्कर मिल रही है। ओवीएल ने शुरुआती बोली 1,290 पेंस प्रति शेयर के हिसाब से लगाई है। इस पूरे मामले से जुड़े एक निवेश बैंकर का कहना है, ‘इस बोली की कीमत 1,500 पेंस प्रति शेयर तक जाने की उम्मीद है। इस तरह से इंपीरियल एनर्जी की हैसियत तकरीबन 140 अरब रुपये (3.5 अरब डॉलर) की हो जाएगी।’
फिलहाल कंपनी के शेयर 1,121 पेंस प्रति शेयर के स्तर पर हैं जिसके हिसाब से कंपनी का आंकलन 2.6 अरब डॉलर बैठता है। इंपीरियल एनर्जी के संभावित भंडार, ओएनजीसी के संचित भंडारों के 11 फीसदी के बराबर है। गौरतबल है कि ओएनजीसी 18 देशों में 38 तेल एवं गैस परियोजनाओं पर काम कर रही है।
इस मामले में एक और पेंच फंसा हुआ है वह है रूसी सरकार का रुख क्योंकि इस सौदो के लिए रूसी सरकार की मंजूरी मिलना बेहद जरूरी है। हाल ही में रूसी सरकार ने देश के तेल एवं गैस को राष्ट्रवाद के साथ जोड़कर कुछ कड़े कदम उठाए हैं।
बताया जा रहा है कि ओवीएल पहले ही रूसी एजेंसियों से बात कर चुकी है जहां से उसे सकारात्मक जवाब ही मिला है। ओवीएल की सखालिन-1 में 20 फीसदी की हिस्सेदारी है और सखालिन-2 में भी कुछ हिस्सेदारी को लेकर रूसी सरकार से उसकी बातचीत चल रही है।