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ग्रीनको क्लाउड प्लेटफार्म के माध्यम से उर्जा संग्रह करेगी

Last Updated- December 11, 2022 | 5:30 PM IST

हैदराबाद स्थित ग्रीनको ग्रुप ने देश के पहले एकीकृत हरित ऊर्जा संग्रह परियोजना लॉन्च किया है जो उद्योगों, राज्य विद्युत वितरण कंप​नी को एक क्लाउड प्लेटफार्म के अंदर थोक ऊर्जा उपल​ब्ध करवाएगा।

ग्रीनको के संस्थापक, अध्यक्ष और संयुक्त प्रबंध निदेशक महेश कोल्ली ने कहा कि उपभोक्ता इस हरित ऊर्जा परियोजना को एक अनुबंध के तहत खुद नियंत्रित कर सकते हैं। कंपनी ने एक ‘इंटेलिजेंट इनर्जी क्लाउड स्टोरेज प्लेटफार्मा’ की स्थापना की है जिसमें उपभोक्ता इसकी सदस्यता लेकर इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।  
ग्रीनको ने अभी आंध्र प्रदेश में 5.2 गीगावॉट के अक्षय उर्जा भंडार परियोजना के निर्माण की शुरुआत की है। इस परियोजना की कुल क्षमता 10 गीगावॉट की है जिसमें 3 गीगावॉट सौर उर्जा और 0.5 गीगावॉट पवन उर्जा का भंडारण होगा। इस परियोजना में पहले से आरसेलरमित्तल, अयाना रेनेबल जैसे कई निजी निवेशक जुड़ चुके हैं, ​इसके साथ साथ कंपनी ने बिहार, राजस्थान आदि में ऊर्जा बिक्री हेतु सोलर इन​र्जी कॉरपरेशन ऑफ इंडिया के साथ समझौता भी किया है। 

कोल्ली कहते हैं कि उद्योगों को लगातार कार्बन मुक्त ऊर्जा की जरूरत होती है। जो गैस और कोयले पर निर्भर हो, उन्हें कभी कभी पारं​परिक उर्जा व्यवस्था में दिक्कतें हो सकती हैं, लेकिन एकीकृत ऊर्जा भंडारण में उन्हें मिलने वाली ऊर्जा के मालिक वह खुद होंगे। इस मॉडल में उपभोक्ता कंपनी को परियोजना में निवेश करना होगा, जिसका निर्माण ग्रीनको करेगा। उर्जा संग्रह एक अनुबंध के तहत होगा। क्लाउड प्लेटफॉर्म के माध्यम से हम किसी के स्वामित्व वाला एक विशाल नेटवर्क प्रदान कर रहे हैं और हम उद्योग को उस रूप में ऊर्जा प्रदान करेंगे जो उद्योग चाहता है।
कोल्ली ने कहा कि अमेजन वेब सर्विसेज जैसी एकीकृत क्लाउड सेवाओं की तरह यह भंडारण का नेटवर्क मांग-आपूर्ति पैटर्न का विश्लेषण, पूर्वानुमान, ऊर्जा प्रबंधन और प्रेषण भी करेगा। शुरुआत में सौर ऊर्जा मांग का समर्थन नहीं कर रही है, इसलिए भंडारण एक परत प्रदान करेगा। बिना सूचना के बिजली नहीं भेजे जाने पर डिस्कॉम को डीएसएम (विचलन निपटान तंत्र) शुल्क का भुगतान करना पड़ता है। वह जोखिम और लागत भी टल जाती है।

ग्रीनको द्वारा  ऊर्जा भंडारण प्रणाली ‘ऑफ स्ट्रीम क्लोज्ड लूप पंप हाइड्रो सिस्टम’ है जिसमें बैटरी भंडारण की लागत का आधा और अधिक टिकाऊ है। भारत को सौर और पवन ऊर्जा की विकास योजनाओं के साथ मिलकर भंडारण की जरूरतों को पूरा करने के लिए करीब 50 गीगावॉट घ‍ंटा वाले   हाइड्रो पंप की आवश्यकता होगी। कोल्ली ने कहा कि चीन 200 गीगावॉट पंप स्टोरेज की योजना बना रहा है। नई विकास रणनीति के लिए कार्बन मुक्त बिजली की जरूरत होगी जो सस्ती भी है। ग्रीनको 2017 से इस व्यवसाय में है और अब ऊर्जा प्लस भंडारण, यदि सस्ता नहीं है, पर गैर-पिथेड कोयला आधारित बिजली के दाम के बराबर है। इसके तीन परियोजना इकि्वटी फंडेड हैं और दो परियोजनाओं के लिए निवेशक पहले ही मिल चुका है।

First Published - July 18, 2022 | 5:42 PM IST

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