सांस्कृतिक शहर वाराणसी में सामाजिक-आर्थिक बदलाव की हवा बह रही है। इस शहर के लघु एवं मझोले उद्योगों में उद्यमियों की पत्नियां भी बढ़-चढ़ कर भूमिका निभा रही हैं।
होटल कारोबार, फिटनेस, वस्त्र निर्माण और छोटे होटलों जैसे क्षेत्रों में लघु एवं मझोले उद्यमों (एसएमई) में अच्छा मुनाफा बटोरने के लिए कारोबारी अपनी पत्नियों को भी इन व्यवसायों में भागीदार बना रहे हैं।
सिनर्जी एक्सपोर्ट फैशन हाउस के रजत ने बिजनेस स्टैंडर्ड समाचार पत्र को बताया, ‘कुछ समय पहले तक पति-पत्नी अपनी जीविका चलाने के लिए अलग-अलग कंपनियों में अलग-अलग ओहदों पर काम करते रहे हैं। लेकिन जब हम एसएमई क्षेत्र की बात करते हैं तो इसके लिए किसी बाहरी व्यक्ति को भागीदार बनाने के बजाय इसमें अपने परिवार को शामिल करना एक अच्छा विकल्प है।’
रजत पिछले 10 साल से फैब्रिक एक्सपोर्ट से जुड़े हुए हैं। कुछ साल पहले एक फैशन डिजाइनर से शादी होने के बाद उनकी जिंदगी ही बदल गई है। रजत ने बताया, ‘शादी के बाद हमने अपना गारमेंट एक्सपोर्ट खोलने की योजना बनाई। मुझे फैब्रिक से जुड़े कार्य में अच्छा अनुभव है और मेरी पत्नी भी एक अच्छी डिजाइनर है। अब मुझे अपना बिजनेस चलाने के लिए किसी बाहरी विशेषज्ञ की जरूरत नहीं है।’
माधुरी ने चहकते हुए कहा, ‘अपना स्वयं का बिजनेस शुरू करने से हमारी आय में काफी इजाफा हुआ है।’ वाराणसी में माधुरी और रजत का यह एकमात्र उदाहरण नहीं है। इस शहर में कई ऐसे दंपती हैं जिन्होंने साथ मिलकर अपना व्यवसाय शुरू किया है और एक टीम के तौर पर व्यवसाय का प्रबंधन कर रहे हैं।
बनारस में छोटे स्कूलों की शृंखला चलाने वाले बाबा मधोक ने कहा, ‘व्यावसायिक परिवारों की ओर से चलाए जाने वाले लद्यु उद्योगों के लिए यह ताजा विस्तार है। पति पत्नी दोनों स्वयं शुरू किए गए इस व्यवसाय में भागीदारी निभा रहे हैं और इसे प्रमोट और प्रबंधित करने के लिए सामूहिक रूप से अपनी क्षमताओं का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे उन्हें अच्छा परिणाम हासिल करने और कार्य स्थल पर सामंजस्य बढ़ाने में मदद मिली है।’
उन्होंने कहा, ‘यह वाराणसी जैसे शहर में सामाजिक-आर्थिक बदलाव लाने के लिए बेहद जरूरी है जहां महिलाओं को पहले घर से बाहर काम करने की अनुमति नहीं दी जाती थी।’ बाबा ने पूजा से शादी करने के बाद स्कूल खोलने की अपनी यात्रा की शुरुआत की थी। आज उनके स्कूल की तकरीबन 6 शाखाएं, एक होटल और एक जिम हैं।
लघु एवं मझोले उद्योगों को कोष की व्यवस्था और उचित प्रबंधन के अभाव का सामना करना पड़ता रहा है। दूसरी तरफ एसएमई में कम वेतन होने के कारण कुशल प्रबंधन स्नातक इस क्षेत्र में आने को इच्छुक नहीं हैं। इससे इस उद्योग पर बुरा प्रभाव पड़ा है। इसलिए इस उद्योग में परिवार के सदस्यों को भागीदार बनाने का नया चलन स्वागत योग्य कदम है।