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2017 से उबर ने कैसे बदली अपनी रणनीति

Last Updated- December 11, 2022 | 5:36 PM IST

उबर पर इंटरनैशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टीगेटिव जर्नलिज्म (आईसीआईजे) की ताजा जांच रिपोर्टिंग ने इसे लेकर विभिन्न जानकारियों का खुलासा किया है कि किस तरह से कंपनी ने अपना व्यवसाय खड़ा करने की राह में स्थानीय नियमों का उल्लंघन किया। इसके बाद से कंपनी नुकसान को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है। 2017 से पूर्व के अपने प्रबंधन के कार्यों से खुद को दूर रखते हुए उबर ने ‘गलतियों’ को स्वीकार किया है, हालांकि कहा कि सीईओ दारा खुसरोशाही के कार्यकाल में  यह एक अलग एवं खास कंपनी थी।
उबर ने कल जारी अपने एक बयान में कहा, ‘2017 से पहले उबर की गलतियों पर रिपोर्टिंग की कमी नहीं थी। सैकड़ों मामले प्रकाशित हुए, कई किताबें लिखी गईं, यहां तक कि टीवी सीरीज भी इससे जुड़ी हुई थी।’
पांच साल पहले जो गलतियां की गई थीं, उनमें से एक बेहद चर्चित घटनाक्रम कॉरपोरेट अमेरिका के इतिहास में गलत गणना से जुड़ा हुआ था।
कंपनी ने नए मुख्य कार्याधिकारी के तौर पर दारा खोसरोवशाही को शामिल किया और जांच तथा अपनी व्यावसायिक कार्य प्रणालियों को ध्यान में रखते हुए पूर्व अमेरिकी अटॉर्नी जनरल एरिक होल्डर की भी सेवा ली। होल्डर के सुझाव के तहत खुसरोशाही ने कंपनी के मूल्यों में बदलाव किया, नेतृत्व टीम में फेरबदल किया, सुरक्षा को कंपनी की मुख्य प्राथमिकता बनाया, श्रेष्ठ कॉरपोरेट प्रशासन पर अमल किया, स्वतंत्र बोर्ड अध्यक्ष की नियुक्ति की और एक पब्लिक कंपनी के तौर पर परिचालन के लिए सख्त नियंत्रण एवं जरूरी अनुपालन पर जोर दिया।
कंपनी के बयान में कहा गया है, ‘जब हमने कहा कि उबर आज अलग कंपनी है, तो हमारा मतलब है उबर के 90 प्रतिशत कर्मचारी दारा के सीईओ बनने के बाद कंपनी में शामिल हुए और नया फोकस था जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ना।’
उबर में बड़ा बदलाव पिछले साल तब आया जब उसने ब्रिटेन की व्यापार यूनियन संस्था जीमबी के साथ समझौता किया और कहा कि उसके निजी तौर पर नियुक्त चालक इसके सदस्य होंगे। द गार्जियन की रिपोर्ट मंक कहा गया कि अदालती निर्णय के बाद उबर ने 70,000 ब्रिटिश चालकों को घंटे के हिसाब से न्यूनतम पारिश्रमिक, अवकाश भुगतान और पेंशन की गारंटी पर सहमति जताने के बाद मार्च में दो महीने का सौदा किया।
भारतीय परिचालन
भारत सरकार के साथ उबर का विवाद स्पष्ट था। पिछले महीने ही केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने उबर और ओला, दोनों को उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन की बढ़ती शिकायतों के खिलाफ चेताया गया था।
सीसीपीए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की कि प्राधिकरण ने उपभोक्ताओं से मिल रही शिकायतों के आधार पर उबर समेत ऑनलाइन कैब बुकिंग प्लेटफॉर्मों के लिए नोटिस जारी किए हैं। इन नोटिसों के संबंध में जांच अभी भी चल रही है।

First Published - July 12, 2022 | 11:54 PM IST

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